सेंट्रल സെക്രട്ടेरिएट लाइब्रेरी शिफ्टिंग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा विस्तृत हलफनामा

Kittu Kumari15 October 20262 min read0 viewsNational
सेंट्रल സെക്രട്ടेरिएट लाइब्रेरी शिफ्टिंग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा विस्तृत हलफनामा

देश की 135 साल पुरानी ऐतिहासिक सेंट्रल സെക്രട്ടेरिएट लाइब्रेरी (CSL) को उसके मौजूदा ठिकाने से हटाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह पूरी कवायद सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत शास्त्री भवन परिसर को खाली कराने के आदेश के बाद शुरू हुई है।

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र से पूछा है कि लाइब्रेरी के लिए नई जगह कहां तय की गई है और वहां का लेआउट प्लान क्या होगा। दरअसल, इस लाइब्रेरी के भविष्य और उपलब्ध जगह को लेकर काफी चिंताएं जताई गई थीं। शुरुआती खबरों में यह दावा किया गया था कि लाइब्रेरी को केवल दो कमरों में सिमटा दिया जाएगा, जिसका कुल क्षेत्रफल मात्र 300 वर्ग मीटर होगा।

जगह के दावे और किताबों का विशाल संग्रह

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कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश हुई एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने इन दावों को खारिज किया। उन्होंने अदालत को बताया कि सेंट्रल विस्टा प्लान के तहत लाइब्रेरी के लिए दो मंजिलों पर लगभग 5,200 वर्ग फुट जगह निर्धारित की गई है, जो कि वर्तमान में लाइब्रेरी द्वारा उपयोग की जा रही 4,144 वर्ग फुट जगह से अधिक है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि कर्तव्य पथ पुनर्विकास में लाइब्रेरी के लिए पर्याप्त जगह शामिल है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने लाइब्रेरी के विशाल संग्रह के प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। गौरतलब है कि शास्त्री भवन में करीब 8.5 लाख किताबें हैं और आर.के. पुरम में दो लाख अतिरिक्त वॉल्यूम रखे हुए हैं। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक डिजिटलीकरण के दौर में भी ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स और किताबों के संरक्षण से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। अदालत यह जानना चाहती है कि क्या नई प्रस्तावित जगह में इन लाखों किताबों को सुरक्षित तरीके से रखा जा सकेगा।

इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में मदद के लिए सीनियर काउंसिल हरिप्रिया पद्मनाभन को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) नियुक्त किया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर, 2026 को होगी, जिसमें केंद्र सरकार को अपनी विस्तृत योजना पेश करनी होगी।

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