सेंट्रल दिल्ली के 25% Teenagers को पूरी नींद नहीं मिलती, Study में चौंकाने वाला खुलासा!

मई 2026 में Indian Journal of Community Medicine में पब्लिश हुई एक नई Study से बड़ा खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक, सेंट्रल दिल्ली के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त (aided) और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले 12 से 18 साल के लगभग 22.5% Teenagers Sleep Deprivation (नींद की कमी) से जूझ रहे हैं। इस Research में कुल 1,452 Teenagers का Evaluation किया गया था, जिसमें पर्याप्त नींद न मिलने और Academic Performance गिरने के बीच गहरा संबंध सामने आया है।
- सेंट्रल दिल्ली के 22.5% School-going Teenagers नींद की कमी का शिकार हैं।
- पर्याप्त नींद न लेने वाले Students का Average Academic Score 64% रहा, जबकि पूरी नींद लेने वालों का Score 67% था।
- Study में शामिल 48.3% Students को हफ्ते में कम से कम एक बार दिन में नींद से लड़ने में परेशानी होती है।
- 60% Participants में Depressive Symptoms और 65.7% में Poor Cognitive Functioning पाई गई है।
नींद की कमी और Academic Performance पर असर
Study के Findings के अनुसार, कम सोने वाले Students का Average Academic Score 64% दर्ज किया गया, जबकि पूरी नींद लेने वाले उनके Peers (साथियों) का Average Score 67% था। Research से यह भी पता चला कि 48.3% Participants को हफ्ते में कम से कम एक बार दिन के समय जागने रहने में संघर्ष करना पड़ता है। इसके अलावा, 60% Participants में Depressive Symptoms (अवसाद के लक्षण) और 65.7% में Poor Cognitive Functioning (खराब संज्ञानात्मक कार्यप्रणाली) देखने को मिली, जिसका स्तर Mild से Moderate (हल्के से मध्यम) था।
नींद पूरी न होने के मुख्य कारण और Screen Time
Researchers ने Poor Sleep Hygiene (खराब नींद की आदतों) के पीछे Excessive Screen Use (अत्यधिक स्क्रीन उपयोग), Academic Stress (पढ़ाई का तनाव) और Late-night Binge-watching को मुख्य कारण बताया है। मार्च 2026 के एक Broader Survey के अनुसार, दिल्ली के 66% Teenagers Smartphone के इस्तेमाल की वजह से रात 11 बजे के बाद सोते हैं, और 46% Teenagers Notifications चेक करने के लिए रात में जागते हैं। Child Online Protection (COP) App के Founder संदीप कुमार ने बताया कि Smartphones ने सोने का समय काफी बढ़ा दिया है, जिससे Mental Development (मानसिक विकास) और Emotional Stability (भावनात्मक स्थिरता) के लिए जरूरी Patterns बाधित हो रहे हैं।
Doctors और Experts की चेतावनी
सर गंगा राम अस्पताल के Institute of Child Health की Senior Consultant और Adolescent Paediatrician डॉ. लतिका भल्ला ने जोर देकर कहा कि Emotional Regulation और Learning के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि ये कमियां अक्सर तब तक अनसुनी रह जाती हैं जब तक वे Severe Concentration Issues (ध्यान केंद्रित करने की गंभीर समस्या) या Psychological Challenges के रूप में सामने नहीं आतीं। यह Study सर गंगा राम अस्पताल, National Health Systems Resource Centre (NHSRC), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत ICMR-Dr A S Paintal Distinguished Scientist Chair और Armed Forces Medical College के Researchers का Collaborative Effort थी।