मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में भारी विरोध, सड़कों पर उतरे हजारों लोग

देश की राजधानी दिल्ली इस समय भारी तनाव और हंगामे के बीच है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। 12 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे, जिससे पूरे शहर की रफ्तार थम गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान भारी गड़बड़ियां की गई हैं, जिसकी वजह से करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
लोकतंत्र बचाने के लिए निकाले गए इस 'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' का रुख सुप्रीम कोर्ट की तरफ था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने दिल्ली मेट्रो के छह स्टेशनों को बंद कर दिया और शहर भर में ट्रैफिक पाबंदियां लगा दीं। इससे पहले 10 और 11 अक्टूबर को भी पुलिस ने कड़ा एक्शन लिया था, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और AISA, SFI व KYS जैसे वामपंथी छात्र संगठनों के हजारों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। हालांकि 11 तारीख को कुछ पाबंदियां हटाई गईं, लेकिन दिल्ली पुलिस की भारी तैनाती अब भी जारी है। CJP नेता अभिजीत डिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका ने चेतावनी दी है कि जब तक CEC इस्तीफा नहीं देते, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
राजनीतिक घमासान और कानूनी पेच
इस पूरे विवाद पर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजधानी को 'जेल' बना दिया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार के भीतर के करीब 200 अधिकारी विपक्ष को जानकारियां दे रहे हैं। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग को 'सरकार की कठपुतली' करार देते हुए इसे लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई बताया। दूसरी तरफ, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इन प्रदर्शनों को 'फ्लॉप शो' कहा और इसमें शामिल लोगों को अराजक तत्व बताया।
कानूनी मोर्चे पर, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार कर दिया और उन्हें कानूनी रास्तों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए और किसी को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। उधर, दिल्ली हाई कोर्ट 13 अक्टूबर को जंतर मंतर को विरोध स्थल के रूप में बंद करने की याचिका पर सुनवाई करेगा। दिल्ली पुलिस ने इसके विकल्प के तौर पर CBD, रामलीला और बुराड़ी ग्राउंड का सुझाव दिया है।
चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची का संशोधन एक मानक प्रक्रिया है, ताकि मृत या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें। आयोग का कहना है कि अगर गलती से किसी का नाम कटा है, तो वे दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं। गौरतलब है कि कानूनन मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होता है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की अपील की है, जिसे भारतीय विदेश मंत्रालय ने बाहरी हस्तक्षेप बताकर खारिज कर दिया है।