मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर बीजेपी और विपक्ष आमने-सामने

Kittu Kumari25 September 20262 min read2 viewsNational
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर बीजेपी और विपक्ष आमने-सामने

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और अंदरूनी कलह

नई दिल्ली में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेद सामने आए हैं। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (यूबीटी) और वाम दलों के नेताओं ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया है और फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग की है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

बीजेपी का पलटवार और केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिक्रिया

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भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। बीजेपी ने इन आरोपों को चुनावी हार से ध्यान भटकाने के बहाने बताया है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राहुल गांधी के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग सही नहीं है, तो कांग्रेस केरल में चुनाव कैसे जीती। वहीं, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग को जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए। पश्चिम बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने निष्पक्ष चुनाव कराए हैं।

विपक्ष का कड़ा विरोध और राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और यह कोई मामूली बात नहीं है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आयोग के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें सभी फैसले सर्वसम्मति से होने की बात कही गई थी और उन्होंने सभी फाइलें सार्वजनिक करने की मांग की। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी ज्ञानेश कुमार को हटाने और पुनरीक्षण प्रक्रिया रोकने की मांग की है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत और राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। राजद ने बिहार में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए।

चुनाव आयोग की सफाई

इन सभी विवादों के बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि आंतरिक तकनीकी टिप्पणियां और लिखित सवाल बहु-सदस्यीय निकाय में सामान्य प्रक्रिया हैं। आयोग ने आश्वस्त किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे और उन्हें पूरी कानूनी मंजूरी प्राप्त है। चुनाव आयोग ने कहा कि सभी फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे।

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