दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण रोकने के लिए सीएक्यूएम ने ग्रैप नियमों में किए बड़े बदलाव

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) में व्यापक संशोधन की घोषणा की है। यह संशोधन 28 सितंबर 2026 को सीएक्यूएम अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में हुई पूर्ण बैठक के दौरान स्वीकृत किए गए और 29 सितंबर 2026 को आधिकारिक रूप से घोषित किए गए, जो नवंबर 2025 के बाद से इस ढांचे का पहला बड़ा बदलाव है।
वाहन और परिवहन से जुड़े कड़े नियम
अद्यतन ग्रैप-3 नियमों के तहत, प्रदूषण फैलाने वाले मालवाहक वाहनों, विशेष रूप से बीएस-4 और पुराने मॉडल, को आवश्यक सामान ले जाते समय भी प्रवेश प्रतिबंधों से छूट नहीं दी गई है; केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक और अन्य स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों को अनुमति है। इसके अलावा, बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल हल्के चार पहिया वाहनों पर प्रतिबंध को सोनीपत तक बढ़ा दिया गया है। 500 वर्ग मीटर से अधिक के निर्माण और विध्वंस परियोजनाओं के लिए निगरानी प्रोटोकॉल को भी तेज कर दिया गया है।
अंतरराज्यीय बसें और डीजल जनरेटर के नियम
अंतरराज्यीय बस संचालन में भी बदलाव किए गए हैं। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित पड़ोसी राज्यों से दिल्ली-एनसीआर आने वाली अंतरराज्यीय और अंतर्राज्यीय बसों पर प्रतिबंध अब ग्रैप के चरण-2 के बजाय चरण-1 से ही शुरू होंगे। केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 डीजल बसें ही छूट प्राप्त हैं। इसके अलावा, डीजल जनरेटर (डीजी) सेट से संबंधित नियमों को भी कड़ा कर दिया गया है, जिसमें कुछ प्रतिबंधों को चरण-2 से चरण-1 में स्थानांतरित कर दिया गया है।
नए प्रावधान और एक्यूआई श्रेणियां
सीएक्यूएम के तकनीकी सदस्य डॉ. एस.डी. अत्री ने पुष्टि की कि संशोधित ग्रैप ढांचे में अब 55 प्रावधान और 34 नागरिक चार्टर शामिल हैं। चार-चरण की योजना वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) से जुड़ी हुई है: चरण-I (खराब: 201-300), चरण-II (بہत खराब: 301-400), चरण-III (गंभीर: 401-450), और चरण-IV (गंभीर+: 450 से ऊपर)। ये नियम दिल्ली-एनसीआर क्षेत्राधिकार में तुरंत प्रभावी हो गए हैं।