दिल्ली-NCR प्रदूषण: CAQM ने सुप्रीम कोर्ट को बताया ट्रांसपोर्ट और बायोमास हैं मुख्य वजह
CAQM ने सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें ट्रांसपोर्ट और बायोमास बर्निंग को दिल्ली-NCR में प्रदूषण के मुख्य कारण बताया गया है।

दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण के संकट के बीच वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि दिल्ली की हवा को जहरीला बनाने में ट्रांसपोर्ट सेक्टर और बायोमास बर्निंग की सबसे बड़ी भूमिका है। CAQM के मुताबिक, दिल्ली में होने वाले कुल प्रदूषण में ट्रांसपोर्ट सेक्टर की हिस्सेदारी 19% से 24% के बीच है, जबकि कचरा, लकड़ी और फसल अवशेषों को जलाने (बायोमास बर्निंग) से 17% से 23% तक प्रदूषण फैल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस सूर्य कांत कर रहे हैं, ने इस मामले पर गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने विशेष रूप से उन रास्तों पर भारी ट्रैफिक और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर गौर किया, जो दिल्ली को गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद जैसे सैटेलाइट शहरों से जोड़ते हैं। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि 5 नवंबर 2026 तक दिल्ली के प्रदूषण स्तर में पराली जलाने का योगदान लगभग 14% रहा है।
सीजन के हिसाब से बदल रहे हैं प्रदूषण के कारण
CAQM ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि मौसम के हिसाब से प्रदूषण के स्रोत अलग-अलग होते हैं। सर्दियों के दौरान सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर (27%), ट्रांसपोर्ट (23%), बायोमास बर्निंग (20%), सड़क और निर्माण धूल (15%) और उद्योग (9%) मुख्य कारक होते हैं। वहीं, गर्मियों में धूल सबसे बड़ा कारण बनकर उभरती है, जिसकी हिस्सेदारी 27% रहती है, उसके बाद ट्रांसपोर्ट (19%), सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर (17%), उद्योग (14%) और बायोमास बर्निंग (12%) का नंबर आता है।
हवा की गुणवत्ता बेहद खराब होने और AQI के 400 तक पहुंचने के बाद, CAQM ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण (Stage III) को लागू कर दिया है। यह प्रतिबंध 5 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे, जिसके तहत धूल उड़ाने वाले निर्माण कार्यों और पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होगी।