प्रदूषण पर CAQM का सख्त एक्शन: NCR में कई फैक्ट्रियां होंगी सील, अब कैमरों से होगी निगरानी

दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता को सुधारने और प्रदूषण फैलाने वालों पर नकेल कसने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) पूरी तरह एक्शन मोड में है। हाल ही में आयोजित एनफोर्समेंट टास्क फोर्स (ETF) की 141वीं बैठक में क्षेत्रीय अनुपालन और की गई कार्रवाइयों की समीक्षा की गई। इस बैठक में यह साफ हो गया कि जो इकाइयां नियमों की अनदेखी कर रही हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
आंकड़ों की बात करें तो 25 सितंबर से 9 अक्टूबर के बीच कुल 124 निरीक्षण किए गए। इन जांचों के दौरान निर्माण कार्यों, औद्योगिक क्षेत्रों और डीजल जनरेटर सेटों में कुल 55 उल्लंघन पाए गए। इनमें सबसे ज्यादा 35 गड़बड़ियां औद्योगिक सेक्टर में मिलीं, जबकि 15 मामले डीजल जनरेटर से जुड़े थे और 5 निर्माण स्थलों पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।
सख्त कार्रवाई और नई निगरानी प्रणाली
नियमों के उल्लंघन पर CAQM ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो निर्माण परियोजनाओं और तीन औद्योगिक इकाइयों को बंद करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा, 12 इकाइयों को पूरी तरह सील करने की तैयारी है। अधिकारियों ने पर्यावरण मुआवजे और पुन: निरीक्षण जैसी प्रक्रियाएं भी शुरू कर दी हैं, साथ ही कई मामलों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को भेज दिया गया है।
निगरानी को और अधिक पुख्ता करने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जाएगा। CAQM ने आदेश दिया है कि अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले 17 श्रेणियों के उद्योगों को 30 नवंबर, 2026 तक पैन-टिल्ट-ज़ूम (PTZ) कैमरे लगाने होंगे। इन कैमरों के जरिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को रीयल-टाइम वीडियो फीड मिलेगी, जिससे स्टैक उत्सर्जन और ईंधन उपकरणों की कार्यप्रणाली पर सीधी नजर रखी जा सकेगी।
इसके साथ ही, IIT कानपुर के तकनीकी अध्ययन के आधार पर चुनिंदा उद्योगों के लिए 50 mg/Nm³ की सख्त उत्सर्जन सीमा तय की गई है। फ्लाइंग स्क्वॉड को विशेष रूप से 'रेड' और 'ऑरेंज' श्रेणी के उद्योगों के निरीक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक NCR में 28,868 निरीक्षण किए जा चुके हैं, जिनमें 1,837 बंद करने के निर्देश दिए गए और 1,491 इकाइयों को सुधार के बाद फिर से शुरू करने की अनुमति मिली है।