दिल्ली-NCR में पुरानी गाड़ियों की विदाई तय, CAQM पैनल ने तैयार किया फेज-आउट प्लान

दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर अब पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियां ज्यादा दिन नहीं टिक पाएंगी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के एक विशेषज्ञ पैनल ने वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अशोक झुनझुनवाला की अध्यक्षता वाली 15 सदस्यीय समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि प्रदूषण कम करने के लिए पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना अब जरूरी हो गया है।
इस योजना के तहत सबसे पहले BS-I, BS-II और BS-III श्रेणी की गाड़ियों को तुरंत क्षेत्र से बाहर करने की वकालत की गई है। इसके बाद BS-IV वाहनों को साल 2030 तक पूरी तरह हटाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, BS-VI श्रेणी के दोपहिया वाहनों को 2035 और चार पहिया वाहनों को 2040 तक विदा करने का सुझाव दिया गया है। इतना ही नहीं, पैनल ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 1 जनवरी 2031 से सभी नए इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) प्राइवेट चार पहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है, ताकि इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन फ्यूल-सेल जैसे जीरो-टेलपाइप-इमिशन (ZTE) वाहनों को बढ़ावा दिया जा सके।
सर्दियों में बढ़ेंगी पाबंदियां, GRAP के नियमों में बदलाव
प्रदूषण के चरम स्तर को देखते हुए पैनल ने यह प्रस्ताव दिया है कि हर साल 1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच BS-IV वाहनों के चलने पर पाबंदी लगाई जाए। इस साल इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा और अगले साल से इसे पूरी तरह लागू किया जा सकता है। वहीं, साल 2035 तक अगर औसत AQI 200 से ऊपर जाता है, तो BS-VI वाहनों पर भी प्रतिबंध लग सकते हैं।
इसके साथ ही, CAQM ने संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को मंजूरी दे दी है। अब GRAP के स्टेज III और IV के दौरान आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई करने वाले BS-IV और उससे पुराने वाहनों को भी छूट नहीं मिलेगी। अब स्टेज I से ही नॉन-BS-VI इंटर-सिटी और इंटर-स्टेट बसों के साथ-साथ डीजल जनरेटरों पर पाबंदी लागू होगी। यह नियम दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और अब सोनीपत में भी लागू होंगे।
मालवाहक वाहनों के लिए भी सख्त नियम तय किए गए हैं। दिल्ली में 1 जनवरी 2027 से लाइट गुड्स व्हीकल्स (N1 कैटेगरी) के नए रजिस्ट्रेशन बंद होंगे, जिसे जुलाई 2027 तक गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत और जनवरी 2028 तक बाकी NCR जिलों में लागू किया जाएगा। भारी N2 कैटेगरी के वाहनों के लिए भी 1 जनवरी 2028 से केवल इलेक्ट्रिक वाहनों का विकल्प रहेगा।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्माण कार्यों पर भी नजर रखी जाएगी। अब 500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण स्थलों पर PM10 और PM2.5 के स्तर को रियल-टाइम प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। ये सभी कदम दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2026 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के दायरे में उठाए जा रहे हैं।