पराली जलाने वालों की अब खैर नहीं, CAQM तैनात करेगा हाई-टेक ड्रोन

सर्दियों की दस्तक के साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए अपनी रणनीति बदल दी है। अब पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में धान की पराली जलाने वालों को पकड़ने के लिए आसमान से ड्रोन की निगरानी की जाएगी। पराली जलाने पर ड्रोन निगरानी का यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि सैटेलाइट डेटा में अक्सर एक दिन की देरी होती है और शाम के समय की घटनाओं को पकड़ना मुश्किल होता है।
CAQM के सदस्य (तकनीकी) डॉ. एस. डी. अट्ट्री के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के अमृतसर और तरन तारन का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया है। आयोग ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल करें जिनमें GNSS पोजिशनिंग, जियोफेंसिंग और हाई-रिज़ॉल्यूशन RGB कैमरे हों, ताकि लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए सटीक लोकेशन (जियोटैगिंग) के साथ सबूत जुटाए जा सकें।
जुर्माने की राशि बढ़ी, डेटा रहेगा सुरक्षित
प्रशासन अब केवल निगरानी ही नहीं करेगा, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों पर भारी जुर्माना भी लगाएगा। CAQM ने पर्यावरणीय मुआवजे (Environmental Compensation) की दरों में बड़ी बढ़ोतरी की है:
- 2 एकड़ से कम जमीन: जुर्माना ₹2,500 से बढ़ाकर ₹5,000 किया गया है।
- 2 से 5 एकड़ जमीन: जुर्माना ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 किया गया है।
- 5 एकड़ से अधिक जमीन: अब प्रति घटना ₹30,000 का जुर्माना लगेगा।
तकनीकी सख्ती को बढ़ाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ड्रोन से रिकॉर्ड किए गए सभी फुटेज का एक केंद्रीय डेटाबेस बनाया जाए और इसे फसल कटाई के तीन महीने बाद तक सुरक्षित रखा जाए। पंजाब के हॉटस्पॉट इलाकों में करीब 80 से 90 ड्रोन तैनात किए जाएंगे, हालांकि पाकिस्तान सीमा के पास स्थित गांवों के लिए अभी परिचालन अनुमति का इंतजार है।
CAQM केवल दंड पर जोर नहीं दे रहा, बल्कि फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनों के उपयोग और जागरूकता अभियानों को भी बढ़ावा दे रहा है, ताकि किसान पराली जलाने के बजाय मशीनों का विकल्प चुनें।