कैप्टन स्मित मच्छड़ की बहादुरी को सलाम, सांसद विक्रमजीत सहनी देंगे 25 लाख का पुरस्कार

हवा में मौत से जूझते हुए सैकड़ों यात्रियों की जान बचाने वाले जांबाज पायलट कैप्टन स्मित मच्छड़ की वीरता अब देश के सामने एक मिसाल बन गई है। उनकी इस असाधारण हिम्मत को सम्मान देने के लिए राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह सहनी ने 'स्मित मच्छड़ वीरता पुरस्कार' की घोषणा की है, जिसके तहत उन्हें 25 लाख रुपये की राशि दी जाएगी। सहनी का मानना है कि ऐसा साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
सांसद विक्रमजीत सिंह सहनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस पुरस्कार की जानकारी साझा करते हुए कहा कि कॉकपिट पर हुए जानलेवा हमले के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने जिस तरह साहस दिखाया, उससे एक बड़ी त्रासदी टल गई। उन्होंने केवल अपनी जान की परवाह नहीं की, बल्कि विमान में सवार सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
प्रधानमंत्री से अशोक चक्र की मांग
पायलट की इस वीरता को देखते हुए सांसद सहनी ने केवल आर्थिक पुरस्कार तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कैप्टन स्मित मच्छड़ को 'अशोक चक्र' और 'राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार' देने का अनुरोध किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्मित का यह जज्बा देश के युवाओं को जिम्मेदारी और मानवता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।
इस बीच, राजकोट में रहने वाले पायलट के परिवार ने इस सम्मान पर गर्व व्यक्त किया है। उनके चचेरे भाई पुलकित मच्छड़ ने बताया कि पूरा परिवार और समुदाय स्मित के साहस पर गौरवान्वित है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि स्मित फिलहाल रिकवरी स्टेज में हैं और पूरा देश उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है।
बता दें कि यह पूरी घटना 30 सितंबर की है, जब दुबई से तेल अवीव जा रहे विमान में एक गंभीर सुरक्षा संकट पैदा हो गया था। आरोप है कि ओमान के एक को-पायलट ने कमांडर पर चाकू से हमला कर दिया, जिसका मकसद विमान को नीचे गिराना था। इस हमले के कारण विमान महज दो मिनट में करीब 16,000 फीट नीचे गिर गया। ऐसी जानलेवा स्थिति में भी कैप्टन स्मित मच्छड़ ने हमलावर का डटकर मुकाबला किया। अंततः क्रू मेंबर्स और यात्रियों की मदद से हमलावर को काबू में किया गया और विमान की सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई, जिससे सभी 180 यात्रियों की जान बच गई।