विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में सुरक्षा सख्त, 221 CAPF कंपनियों की तैनाती बढ़ी

देश की राजधानी दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने दिल्ली में तैनात 221 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) कंपनियों की अवधि बढ़ा दी है। दरअसल, इनमें से कुछ टुकड़ियों की वापसी 12 अक्टूबर को होनी थी, लेकिन अब उन्हें अगले आदेश तक राजधानी में ही तैनात रहने को कहा गया है। यह कदम दिल्ली पुलिस की उस मांग के बाद उठाया गया है, जिसमें सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत करने की जरूरत बताई गई थी।
संवेदनशील इलाकों में कड़ी निगरानी और सुरक्षा का घेरा
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को गृह मंत्रालय को एक औपचारिक पत्र भेजकर 273 CAPF कंपनियों की तैनाती 20 अक्टूबर तक बढ़ाने का अनुरोध किया था। सुरक्षा बलों की यह बड़ी तैनाती मुख्य रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के कारण की गई है, जिसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया जा रहा है। इन प्रदर्शनों में 'कॉकरोच जनता पार्टी', भीम आर्मी, विभिन्न छात्र संगठन और इंडिया गठबंधन के समर्थक शामिल हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने राजधानी के कई इलाकों को बेहद संवेदनशील माना है। विशेष रूप से जंतर मंतर, चुनाव आयोग का कार्यालय, संसद भवन और इंडिया गेट जैसे स्थानों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। गौरतलब है कि सोमवार को जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया है। वर्तमान में दिल्ली पुलिस की मदद के लिए लगभग 26,000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जिनमें CRPF, SSB, ITBP, CISF और RAF जैसे बलों के जवान शामिल हैं।
पूर्व CRPF महानिरीक्षक आर.के. यादव के अनुसार, सरकार का यह निर्णय संभावित खतरों और खुफिया जानकारियों पर आधारित है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (ऑपरेशंस) ने चेतावनी दी थी कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है और बैरिकेड्स तोड़े जा सकते हैं, जिसके चलते सुरक्षा बलों की मौजूदगी जरूरी है।