दिल्ली में CAPF की लंबी तैनाती पर सवाल, रिटायर्ड सिविल सर्वेंट ने हाई कोर्ट में दाखिल की PIL

रिटायर्ड सिविल सर्वेंट आशीष जोशी ने दिल्ली में CAPF की लंबी तैनाती को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में PIL दाखिल की है।

Kittu Kumari30 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में CAPF की लंबी तैनाती पर सवाल, रिटायर्ड सिविल सर्वेंट ने हाई कोर्ट में दाखिल की PIL

देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था को संभालने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की जो लंबी तैनाती की गई है, अब उस पर कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं। रिटायर्ड सीनियर सिविल सर्वेंट आशीष जोशी ने इस मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई है कि बिना किसी ठोस आधार के इन बलों की तैनाती की समय सीमा को बार-बार बढ़ाया जा रहा है।

आशीष जोशी ने अपनी याचिका में यह मुद्दा उठाया है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में CAPF कंपनियों की तैनाती की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआत में 301 कंपनियों की मंजूरी दी गई थी, जिसमें से 273 कंपनियों को 31 अक्टूबर 2026 तक और फिर 270 कंपनियों को 16 नवंबर 2026 तक के लिए रिटेन किया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन हो सकती है, क्योंकि यह शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक सभाओं के अधिकार को प्रभावित करता है।

तैनाती के आधार और प्रभाव की होगी जांच की मांग

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इस याचिका के जरिए कोर्ट से मांग की गई है कि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को गृह मंत्रालय के मूल आदेश, पुलिस की मांग (requisitions) और रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखनी चाहिए। याचिका में यह भी पूछा गया है कि दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में बलों की तैनाती से उनके अन्य महत्वपूर्ण कार्यों पर क्या असर पड़ रहा है, जैसे कि सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और आपदा प्रबंधन।

याचिका में कुछ महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें रखी गई हैं:

  • तैनाती के विस्तार के लिए लिखित और तर्कसंगत आदेश होने चाहिए, जिसमें जरूरत और भौगोलिक स्थिति का जिक्र हो।
  • हर 14 दिन के अंतराल पर इन तैनातीयों की समीक्षा (Review) की जानी चाहिए।
  • सिविल अथॉरिटी और कमांड स्ट्रक्चर की जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए।
  • एक लिखित प्रोटोकॉल बनाया जाए जो विरोध प्रदर्शनों के दौरान CAPF की लंबी तैनाती को नियंत्रित करे।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि याचिका में यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि सिविल पावर की मदद के लिए CAPF की तैनाती का मतलब यह नहीं है कि उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हटाने या बिना कारण हिरासत में लेने की खुली छूट मिल जाए। याचिका के अनुसार, किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई के लिए वैधानिक और संवैधानिक आवश्यकताओं का पालन करना अनिवार्य होना चाहिए।

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