दिल्ली में CAPF की तैनाती के विस्तार को चुनौती, हाई कोर्ट में PIL दाखिल
रिटायर्ड सिविल सर्वेंट आशीष जोशी ने दिल्ली में CAPF की तैनाती के विस्तार को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की लंबी तैनाती अब कानूनी विवादों के घेरे में आ गई है। रिटायर्ड सीनियर सिविल सर्वेंट आशीष जोशी ने इस मुद्दे को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में सरकार द्वारा बार-बार दी जा रही तैनाती की समय-सीमा विस्तार (extension) पर सवाल उठाए गए हैं और इसकी न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है।
अधिवक्ता अंबुज दीक्षित और अमरीश रंजन पांडे के माध्यम से दायर इस याचिका में यह जानने की कोशिश की गई है कि आखिर किन कानूनी और प्रशासनिक आधारों पर इन बलों को लंबे समय तक दिल्ली में तैनात रखा जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह इस तैनाती की आवश्यकता, इसकी अवधि और समय-समय पर होने वाली समीक्षा प्रक्रियाओं की जांच करे।
सुरक्षा दावों और संवैधानिक अधिकारों पर सवाल
याचिका के अनुसार, केंद्र सरकार ने शुरुआत में 301 कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दी थी, जिसे बाद में घटाकर 273 कर दिया गया और इनकी अवधि 31 अक्टूबर 2026 तक रखी गई। इसके बाद फिर से 270 कंपनियों की तैनाती को 16 नवंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया। बताया जा रहा है कि रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली, संभावित विरोध प्रदर्शनों और त्योहारों के सीजन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया था।
आशीष जोशी ने अपनी याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का हवाला देते हुए कहा है कि इस तरह की लंबी तैनाती शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक सभाओं के अधिकार को प्रभावित करती है। उन्होंने मांग की है कि:
- गृह मंत्रालय (MHA) के मूल आदेश, पुलिस की मांग और रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए।
- भविष्य में किसी भी विस्तार के लिए लिखित और तर्कसंगत आदेश जारी किए जाएं।
- तैयानाती की समीक्षा हर 14 दिन में की जानी चाहिए।
इसके अलावा, याचिका में यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि नागरिक शक्ति की सहायता के लिए तैनात CAPF बलों को यह अधिकार नहीं मिलना चाहिए कि वे स्वतः ही शांतिपूर्ण सभाओं को तितर-बितर करें, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लें या बल प्रयोग करें।