दिल्ली के बीचों-बीच प्रदर्शनों से व्यापार ठप, CAIT ने बाहरी इलाकों में मांगे प्रोटेक्ट साइट्स
CAIT ने दिल्ली के व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए ऑनलाइन याचिका शुरू की है, ताकि शहर के बीचों-बीच होने वाले विरोध प्रदर्शनों से व्यापार प्रभावित न हो।

देश की राजधानी दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में होने वाले लगातार विरोध प्रदर्शनों और रैलियों ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। इन प्रदर्शनों के कारण ग्राहकों की आवाजाही और सामान की डिलीवरी बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। इस समस्या के समाधान के लिए कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने एक ऑनलाइन याचिका शुरू की है, जिसमें सरकार से मांग की गई है कि दिल्ली के बाहरी इलाकों में प्रदर्शनों के लिए विशेष स्थल निर्धारित किए जाएं।
CAIT के दिल्ली राज्य अध्यक्ष विपिन आहूजा और राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुमित अग्रवाल सहित कई व्यापारिक संगठनों के नेताओं ने चिंता जताई है कि केंद्रीय दिल्ली के बाजारों में होने वाली रैलियों से न केवल स्थानीय व्यापार बाधित होता है, बल्कि पूरे देश में माल की आवाजाही पर असर पड़ता है। व्यापारियों का कहना है कि दिल्ली मुख्य रूप से एक व्यापारिक और वितरण केंद्र है, यहाँ की अर्थव्यवस्था थोक और खुदरा बाजारों पर टिकी है। ऐसे में जब मुख्य बाजारों में जाम लगता है या रास्ते बंद होते हैं, तो इसका सीधा असर करोड़ों लोगों की आजीविका पर पड़ता है।
लोकतांत्रिक अधिकार और रोजी-रोटी के बीच संतुलन की मांग
व्यापारिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किसी के लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल दूसरों की रोजी-रोटी छीनकर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया है कि सरकार शहर के बाहरी हिस्सों में स्थायी प्रदर्शन स्थल बनाए, जहाँ सुरक्षा, सार्वजनिक परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों। इससे प्रदर्शनकारी अपनी बात भी रख सकेंगे और शहर की आर्थिक गतिविधियां भी सुचारू रूप से चलती रहेंगी।
इस मुद्दे पर रणनीति बनाने के लिए दिल्ली के विभिन्न व्यापारिक संगठनों के बीच एक ऑनलाइन बैठक भी आयोजित की गई है। गौरतलब है कि हाल ही में चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली को 10 नवंबर के बाद तक स्थगित करने का अनुरोध किया था, क्योंकि यह समय त्योहारी सीजन का होता है और रैलियों से व्यापार को भारी नुकसान पहुँचता है।