दिल्ली-NCR में 1 नवंबर से BS-4 कमर्शियल वाहनों की एंट्री बंद, प्रदूषण रोकने के लिए सख्त नियम

1 नवंबर से दिल्ली में BS-4 कमर्शियल वाहनों की एंट्री बंद होगी। जानें क्या है नया नियम और किन वाहनों को मिलेगी छूट।

Kittu Kumari24 October 20262 min read0 viewsNCR
दिल्ली-NCR में 1 नवंबर से BS-4 कमर्शियल वाहनों की एंट्री बंद, प्रदूषण रोकने के लिए सख्त नियम

सर्दियों के मौसम में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली और एनसीआर (NCR) में अब बेहद सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। 1 नवंबर 2026 से दिल्ली की सीमाओं में प्रवेश करने वाले BS-4 कमर्शियल वाहनों और बसों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी जाएगी। यह फैसला वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत लिया गया है। दरअसल, इन वाहनों को दी गई एक साल की रियायत की अवधि 31 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रही है, जिसके बाद अब नियमों का सख्ती से पालन होगा।

यह पाबंदी मुख्य रूप से उन डीजल संचालित हल्के, मध्यम और भारी कमर्शियल वाहनों पर लागू होगी जो दिल्ली के बाहर पंजीकृत हैं। यह प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा, जबकि कुछ विशेष प्रावधान 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेंगे। हालांकि, राहत की बात यह है कि दिल्ली में पंजीकृत वाहनों को इस विशेष एंट्री बैन से छूट दी गई है। इसके अलावा, जो वाहन BS-6 मानक के अनुरूप हैं या फिर CNG, LNG और बिजली (Electric) से चलते हैं, उन्हें बिना किसी रोक-टोक के आने की अनुमति होगी।

PUC सर्टिफिकेट के बिना नहीं मिलेगा ईंधन

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए केवल एंट्री बैन ही नहीं, बल्कि ईंधन वितरण पर भी सख्ती की गई है। 1 नवंबर से "नो PUC, नो फ्यूल" (No PUC, No Fuel) पॉलिसी लागू होगी। इसका मतलब यह है कि यदि किसी वाहन के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) नहीं है, तो पेट्रोल पंप या डीजल पंप उसे ईंधन देने से मना कर देंगे।

GRAP स्टेज III के तहत दिल्ली के साथ-साथ गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और सोनीपत में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार पहिया वाहनों पर भी अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें केवल उन वाहनों को छूट मिलेगी जो दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से संशोधित किए गए हैं।

इन नियमों को लागू करने के लिए गाजियाबाद और बुलंदशहर जैसे पड़ोसी जिलों के परिवहन विभाग ने ट्रांसपोर्ट यूनियनों और ऑपरेटरों को जागरूक करना शुरू कर दिया है। हालांकि, ऑल इंडिया मोटर गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (AIMGTA) ने सरकार से अपील की है कि पूरी तरह लागू करने से पहले 15 दिनों का एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाए, ताकि यह देखा जा सके कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन और रोजगार पर इसका क्या असर पड़ता है।

Share:

Comments

Leave a comment