'Hundred Years Young' किताब का हिस्सा बनने पर बृंदा कोटक ने जताया गर्व, RSS के सिद्धांतों को सराहा

अर्ली-स्टेज इन्वेस्टर और वेंचर स्टूडियो फाउंडर बृंदा कोटक ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर लिखी गई किताब 'Hundred Years Young' का हिस्सा बनने पर अपनी खुशी और गर्व व्यक्त किया है। रश्मि सामंत द्वारा लिखित यह किताब अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले 18 युवाओं के अनुभवों को समेटे हुए है, जो किसी न किसी रूप में RSS से प्रेरित रहे हैं।
बृंदा कोटक ने इस किताब को बेहद खास बताया क्योंकि इसमें 18 अलग-अलग क्षेत्रों के युवा अपने नजरिए से यह साझा कर रहे हैं कि कैसे उन्होंने RSS के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारा। उन्होंने संगठन की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि RSS केवल बातों पर नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई और जमीनी काम में विश्वास रखता है। उनके अनुसार, संगठन ने कभी भी अपने काम के प्रचार-प्रसार या सेल्फ-प्रमोशन को महत्व नहीं दिया, बल्कि उनका ध्यान हमेशा कर्म पर रहा है।
संगठन का लक्ष्य और 'मैन-मेकिंग' की विचारधारा
बृंदा कोटक ने एक दिलचस्प बात साझा करते हुए कहा कि RSS की सबसे सराहनीय बात यह है कि वह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां भारत में इस तरह के संगठन की जरूरत ही न रहे। उन्होंने इसे लक्ष्यों और सिद्धांतों की महानता बताया कि कोई संगठन खुद को इस स्तर पर ले जाना चाहता है जहां उसकी अपनी मौजूदगी की आवश्यकता समाप्त हो जाए।
वहीं, किताब की लेखिका रश्मि सामंत ने बताया कि RSS को किसी एक नजरिए या कम समय में समझना नामुमकिन है। उन्होंने इसे 'जनरेशनल वर्क' यानी पीढ़ियों तक चलने वाला कार्य बताया। सामंत के अनुसार, RSS का मुख्य उद्देश्य 'मैन-मेकिंग' (व्यक्ति निर्माण) है, जो रातों-रात नहीं बल्कि कई पीढ़ियों के प्रयास से संभव होता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह संगठन समाज के हर वर्ग के साथ मिलकर काम करता है और इसका लक्ष्य इतना व्यापक है कि 100 साल का समय भी इसके लिए एक शुरुआत जैसा है।