महिला पत्रकारों के यौन उत्पीड़न पर बृंदा करात का प्रहार, दिल्ली पुलिस की कार्यशैली को बताया 'बेहद गलत'

महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर FIR दर्ज करने में देरी को लेकर सीपीआई(एम) नेता बृंदा करात ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मामला दर्ज करने के लिए वीडियो सबूत मांगना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि बेहद गलत तरीका है। यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब जंतर मंतर के पास हुए एक प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए।
बृंदा करात ने इस मामले पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब एक पत्रकार के साथ यौन उत्पीड़न होता है, तो दिल्ली पुलिस उसे बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर FIR दर्ज करने के लिए पहले वीडियो दिखाने की शर्त रखी जाएगी, तो कानून का क्या मतलब रह जाएगा? करात ने स्पष्ट किया कि FIR दर्ज करना कानून की अनिवार्य आवश्यकता है, न कि किसी वीडियो सबूत पर निर्भर रहने वाली प्रक्रिया।
जंतर मंतर प्रदर्शन और विवाद की शुरुआत
यह पूरा मामला 3 अक्टूबर का है, जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और अन्य संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान एआईएसए की अध्यक्ष नेहा बोरा, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और कपिल सिब्बल सहित कई प्रदर्शनकारियों ने जंतर मंतर के पास पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की थी। डीसीपी नेहा यादव के अनुसार, धारा 163 (BNSS) लागू होने के कारण प्रदर्शनकारियों को वहां से हटने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन बात न मानने पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
हिरासत के बाद तीन महिला पत्रकारों ने शिकायत दर्ज कराई कि पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की और उनका यौन उत्पीड़न किया। इस घटना की गूंज लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तक भी पहुंची। राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि जब महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली फोर्स ही उनके खिलाफ हाथ उठाए, तो दिल्ली की महिलाएं और छात्र डर जाएंगे।
वहीं, दिल्ली पुलिस की डीसीपी नेहा यादव ने अब यह स्पष्ट किया है कि महिला पत्रकारों की शिकायतों पर FIR दर्ज कर ली गई है और उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है। निष्पक्ष जांच के लिए इस पूरे मामले को क्राइम ब्रांच, कमला मार्केट को सौंप दिया गया है। साथ ही, पुलिस ने अपील की है कि यदि किसी के पास इस घटना का कोई वीडियो फुटेज है, तो वे जांच में मदद के लिए उसे साझा करें।