बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा खुलासा, बोले- हुड्डा परिवार और 42 लोगों ने रची थी साजिश

दिल्ली की राउज अवेन्यू कोर्ट ने बीजेपी के पूर्व सांसद और रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने इन आरोपों को झूठा, मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित बताया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने 239 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता पहलवानों ने घटनाओं के बाद आरोपी के साथ वर्षों तक सौहार्दपूर्ण रिश्ते बनाए रखे और उन्हें पारिवारिक आयोजनों तथा विवाह समारोहों में बुलाया। अदालत ने सवाल उठाया कि शिकायतकर्ताओं ने कथित पहली घटना को लेकर गलत देश और साल का जिक्र किया, जो अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर करता है। बृजभूषण शरण सिंह और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को विनेश फोगाट समेत छह महिला पहलवानों की ओर से दर्ज कराए गए मामले में सबूतों की कमी के आधार पर तीन अगस्त को बरी किया गया था। फैसले की एक प्रति 'पीटीआई-भाषा' ने देखी है।
अदालत के फैसले के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने यौन उत्पीड़न की कथित पहली घटना को लेकर गलत देश और साल का जिक्र किया, जिससे साबित होता है कि सभी आरोप झूठे एवं मनगढ़ंत हैं। अदालत ने कहा कि ये आरोप दो अन्य शिकायतकर्ता पहलवानों और महादेव अकादमी के कोच के कहने पर आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ राजनीति से प्रेरित एक गहरी साजिश के तहत लगाए गए थे। फैसले में कहा गया है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने में बुरी तरह नाकाम रहा है। बृजभूषण को आईपीसी की धारा 354, 354ए और 506 (1) के तहत सभी आरोपों से बरी कर दिया गया, जबकि तोमर को धारा 506 (1) के तहत आरोपों से बरी किया गया। रिकॉर्ड पर यह बात सामने आई है कि धरने पर बैठने से पहले यौन उत्पीड़न का कोई आरोप नहीं लगाया गया था।
फैसले में बताया गया है कि चुने हुए कुछ पहलवान सामने आए और यौन उत्पीड़न के आरोपों वाली शिकायतें दर्ज कराईं, जिनकी भाषा और शैली एक समान थी। जिन पांच पीड़िताओं के आरोपों के आधार पर आरोप तय किए गए थे, उनमें से दो ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया और कहा कि उन पर बयान देने का दबाव डाला गया था। अभियोजन पक्ष ऐसी कोई दलील पेश नहीं कर पाया जिससे साबित हो कि आरोपी की हरकत की वजह से इन दो पीड़िताओं ने समर्थन नहीं किया। अदालत में पेश होने और काउंसलिंग के बाद इन पहलवानों ने साफ माना कि उनके साथ यौन उत्पीड़न की कोई घटना नहीं हुई थी। मुख्य गवाह की जिरह के दौरान भी कई विसंगतियां और विरोधाभास सामने आए, जिससे गवाह की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।
इस बीच, बृजभूषण शरण सिंह ने दावा किया है कि हुड्डा परिवार और 42 लोगों ने उनके खिलाफ साजिश रची थी। सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को कुश्ती संघ के चुनाव में हराने के बाद उनके खिलाफ साजिश रची जाने लगी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि महादेव रेसलिंग एकेडमी एक परिवार और एक अखाड़े से जुड़ी है तथा इसे स्थापित करने में भूपेंद्र हुड्डा की भूमिका रही है। सिंह ने कहा कि अदालत का 'एक परिवार, एक अखाड़ा' संबंधी निष्कर्ष उनके बयान पर नहीं, बल्कि दो पीड़ित लड़कियों द्वारा न्यायाधीश के कक्ष में दिए गए बयानों के आधार पर आया है।