महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामला: बृज भूषण शरण सिंह को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका

महिला पहलवानों द्वारा बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृज भूषण शरण सिंह को अंतिम अवसर दिया है।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामला: बृज भूषण शरण सिंह को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका

महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व डब्ल्यूएफआई (WFI) चीफ बृज भूषण शरण सिंह को अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर दिया है। यह मामला उस अपील से जुड़ा है जिसमें महिला पहलवानों ने बृज भूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ऑनलाइन पेश हुए और उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा।

विशेष न्यायाधीश दिग् विनय सिंह ने डिफेंस काउंसिल की दलीलों को सुनने के बाद यह अंतिम मौका दिया और अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को तय की गई है। गौरतलब है कि 8 अगस्त को कोर्ट ने बृज भूषण शरण सिंह और तत्कालीन सचिव विनोद तोमर को इस मामले में बरी कर दिया था, जिसके बाद महिला पहलवानों ने इस फैसले को कानूनन गलत बताते हुए इसे चुनौती दी थी।

पहलवानों ने फैसले को बताया गलत और पुराना

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महिला पहलवानों ने अपनी अपील में तर्क दिया है कि बरी करने का फैसला साक्ष्यों की गलत व्याख्या पर आधारित है। अपील में कहा गया है कि यह आदेश केवल अनुमानों पर टिका है और इसमें कानून के स्थापित सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। साथ ही, यह आरोप भी लगाया गया कि कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के पीड़ितों के व्यवहार के बारे में "पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं" के आधार पर फैसला सुनाया, जबकि सबूतों का निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं किया गया।

इस पूरे विवाद की जड़ें उस एफआईआर में हैं, जो बृज भूषण शरण सिंह के डब्ल्यूएफआई प्रमुख रहते समय दर्ज कराई गई थी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 354, 354-डी, 354-ए, 506(1) और 109 के तहत कार्रवाई की थी। इससे पहले इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 15 जून 2023 को करीब 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इस केस के विरोध में महिला पहलवानों ने जंतर मंतर पर बड़ा प्रदर्शन भी किया था।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि पीड़ितों के नाम वाले मूल हलफनामों और आदेशों को सीलबंद लिफाफे में रखा जाए और अपीलकर्ता को पीड़ितों के नाम हटाकर याचिका की कॉपी जमा करनी होगी। सुनवाई बंद कमरे में आयोजित की गई थी, जिसमें राज्य की ओर से एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मनीष रावत पेश हुए।

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