बृज भूषण शरण सिंह को मिली राहत, महिला पहलवानों की अपील पर जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट ने दिया समय

महिला पहलवानों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में बरी हुए पूर्व डब्ल्यूएफआई (WFI) अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह को राउज एवेन्यू कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने उन्हें उस अपील का जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है, जिसमें उनके बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
दरअसल, महिला पहलवानों ने बृज भूषण शरण सिंह और पूर्व डब्ल्यूएफआई सहायक सचिव विनोद तोमर की रिहाई के खिलाफ अपील की थी। शुक्रवार को स्पेशल जज दिग् विनय सिंह ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान बृज भूषण के वकीलों ने दलील दी कि उन्हें अपील की कॉपी देर से मिली है, इसलिए जवाब तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए अगली तारीख तय की।
पहलवानों ने फैसले को बताया गलत और पुराना
महिला पहलवानों ने कोर्ट में अपनी अपील में कहा है कि बरी करने का फैसला कानूनन सही नहीं है और यह सबूतों की गलत व्याख्या पर आधारित है। अपील में यह आरोप लगाया गया है कि अदालत ने सबूतों के बजाय अनुमानों पर भरोसा किया और यौन उत्पीड़न पीड़ितों के व्यवहार को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं को आधार बनाया, जबकि मामले का निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए था।
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कुछ कड़े निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने आदेश दिया है कि पीड़ितों के नाम वाले मूल हलफनामों और आदेशों को सीलबंद लिफाफे में रखा जाए। साथ ही, अपील करने वालों को निर्देश दिया गया है कि वे याचिका की कॉपी जमा करें, जिसमें पीड़ितों के नाम हटाए गए हों।
बता दें कि यह मामला तब शुरू हुआ था जब महिला पहलवानों ने बृज भूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे और जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि, पूर्व में एसीजेएम अश्विनी पंवार ने बृज भूषण और विनोद तोमर को बरी कर दिया था, जिसके बाद अब यह कानूनी लड़ाई दोबारा तेज हो गई है। कोर्ट ने अब सरकारी वकील से भी यह पूछा है कि क्या राज्य सरकार इस मामले में कोई रिवीजन याचिका दायर करेगी।