बृज भूषण शरण सिंह मामला: बरी होने के खिलाफ अपील पर जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट ने दिया समय
महिला पहलवानों द्वारा बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने के बाद कोर्ट ने बृज भूषण शरण सिंह को जवाब दाखिल करने का समय दिया है।

महिला पहलवानों द्वारा यौन उत्पीड़न के मामले में बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने के बाद, राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व डब्ल्यूएफआई (WFI) प्रमुख बृज भूषण शरण सिंह को अपना जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। यह पूरा मामला उस समय का है जब बृज भूषण शरण सिंह डब्ल्यूएफआई के प्रमुख थे और उन पर महिला पहलवानों ने गंभीर आरोप लगाए थे।
विशेष न्यायाधीश दिग् विनय सिंह ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान बृज भूषण शरण सिंह और विनोद तोमर की ओर से पेश हुए वकीलों ने कोर्ट को बताया कि उन्हें अपील की कॉपी देर से मिली है, इसलिए जवाब तैयार करने के लिए समय की आवश्यकता है। कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को सुना और मामले की अगली सुनवाई तय की। साथ ही, कोर्ट ने अतिरिक्त पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (APP) से यह भी पूछा कि क्या राज्य सरकार की ओर से भी इस मामले में कोई रिविजन फाइल किया जा रहा है।
पहलवानों ने फैसले को कानूनन गलत बताया
महिला पहलवानों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए तर्क दिया है कि निचली अदालत का बरी करने का निर्णय कानूनन टिकाऊ नहीं है। अपील में कहा गया है कि कोर्ट ने सबूतों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया और फैसला केवल अनुमानों पर आधारित है। पहलवानों का आरोप है कि अदालत ने यौन उत्पीड़न के पीड़ितों के व्यवहार के बारे में पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं का सहारा लिया, जबकि सबूतों और परिस्थितियों पर ध्यान नहीं दिया गया।
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी और जून 2023 में करीब 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इस पूरे विवाद के दौरान महिला पहलवानों ने जंतर मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन भी किया था। इससे पहले एसीजेएम अश्वनी पंवार की अदालत ने बृज भूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया था, जिसके बाद अब यह कानूनी लड़ाई ऊपरी अदालत में जारी है।