नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स सम्मेलन 13 सितंबर 2026 को अपने अंतिम दिन में प्रवेश कर गया है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में वैश्विक नेता भारत मंडपम के समिट हॉल में एकत्रित हुए हैं। इस सत्र का मुख्य विषय लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना है। इस आयोजन के बारे में अधिक जानकारी आईटीपीओ ब्लॉग पर देखी जा सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे हैं।
सम्मेलन के पहले दिन 12 सितंबर को सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को अपनाया। इस समूह के सदस्य देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। यह 140 पैराग्राफ का आम सहमति दस्तावेज राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग की प्रतिबद्धता को पुष्ट करता है। साथ ही इसमें वैश्विक शासन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग की गई है। इस संबंध में आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति
विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
इस दौरान ब्रिक्स को वैश्विक मंच पर नियम-निर्माता के रूप में विकसित करने की वकालत की गई है।घोषणापत्र में क्षेत्रीय स्थिरता पर भी ध्यान दिया गया है जिसमें पश्चिम एशिया में तनाव पर चिंता जताई गई है। इसके अलावा 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की भी निंदा की गई है। सम्मेलन के समापन पर नेता बहुपक्षवाद, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने पर चर्चा को अंतिम रूप दे रहे हैं। साथ ही आपसी व्यापार के लिए स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। इस बारे में विस्तृत जानकारी
पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है।
सम्मेलन के अंतिम दिन क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग मुख्य केंद्र बिंदु रहे हैं।