ब्रिक्स संसदीय फोरम: दिल्ली में रूसी ड्यूमा अध्यक्ष वोलोडिन ने युगांडा, क्यूबा और थाईलैंड के समकक्षों से की चर्चा
नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम के दौरान रूसी ड्यूमा अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने युगांडा, क्यूबा और थाईलैंड के प्रतिनिधियों से चर्चा की।

देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम के दौरान कूटनीतिक हलचल तेज रही। रूसी फेडरेशन की स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने इस महत्वपूर्ण आयोजन के इतर युगांडा, क्यूबा और थाईलैंड के संसदीय प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। रूसी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ये बैठकें 25 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित हुईं, जहां विभिन्न देशों के बीच आपसी सहयोग और संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
इन बैठकों में वोलोडिन ने युगांडा के संसद अध्यक्ष मार्कन जैकब ओबोथ, क्यूबा की नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष एना मारिया मारी मचाडो और थाईलैंड के सीनेट अध्यक्ष मोंगकोल सुरासज्जा से मुलाकात की। यह पूरा घटनाक्रम भारतीय संसद भवन परिसर में आयोजित दो दिवसीय फोरम के दौरान हुआ, जिसकी मेजबानी भारत के संसद द्वारा की जा रही है।
वैश्विक प्रभाव और भारत की मेजबानी
इस फोरम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की, जिन्होंने ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के विदेशी प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्घाटन भाषण दिया और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी कार्यक्रम में शामिल हुए। फोरम में 11 ब्रिक्स सदस्य देशों और 10 भागीदार देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें रूस, ब्राजील, युगांडा और क्यूबा के प्रतिनिधि प्रमुख थे।
कार्यक्रम के दौरान राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने ब्रिक्स के वैश्विक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक जीडीपी में इसका योगदान करीब 40 प्रतिशत है। वहीं, सांसद राजीव राय ने उम्मीद जताई कि यह मंच अंतरराष्ट्रीय शांति, विकास और विदेश नीति पर चर्चा करने के साथ-साथ अमेरिका के बढ़ते प्रभाव के बीच एक संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित होगा।
गौरतलब है कि वर्तमान में भारत के पास ब्रिक्स की अध्यक्षता है। इस संसदीय फोरम का मुख्य उद्देश्य सदस्य और भागीदार देशों के सांसदों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है, जहां वे साझा चुनौतियों पर विचार साझा कर सकें और आपसी सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बना सकें।