BRICS संसदीय फोरम: संस्थानों को अधिक पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने पर चर्चा करेंगे सदस्य देश
दिल्ली के संविधान सदन में BRICS संसदीय फोरम का आयोजन। स्पीकर ओम बिरला ने लोकतांत्रिक मूल्यों और जन-केंद्रित विकास पर जोर दिया।

देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक संविधान सदन में 12वें BRICS संसदीय फोरम का आगाज हो गया है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में सदस्य और भागीदार देशों के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस अवसर पर जोर दिया कि इस फोरम का मुख्य उद्देश्य संसदीय संस्थानों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, जवाबदेह और लोगों की जरूरतों के मुताबिक बनाना है।
दो दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। स्पीकर ओम बिरला ने प्रतिनिधिमंडलों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इन देशों का आना एक खास अनुभव है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं को अवसरों से जोड़ना, विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना और ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंद करना सभी की साझा प्राथमिकता होनी चाहिए।
जन-केंद्रित विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर
इस फोरम की थीम "जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को बढ़ावा देना" रखी गई है। चर्चा के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहेंगे:
- मजबूत लोकतांत्रिक संस्थानों का निर्माण और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में उनकी भूमिका।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उभरती डिजिटल तकनीकों पर विधायी निगरानी।
- संस्थागत क्षमता निर्माण और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति।
- संसदीय कूटनीति और बेहतरीन विधायी प्रथाओं का आदान-प्रदान।
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सदस्य और भागीदार देशों के स्पीकर्स और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात की। इस आयोजन में 11 सदस्य देशों और 10 भागीदार देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं, जिनमें युगांडा, क्यूबा, ब्राजील और रूस जैसे देश शामिल हैं।
ओम बिरला ने बताया कि BRICS अब अपने गठन के 20 साल पूरे कर चुका है और यह दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। यह समूह विविधता में एकता और सामूहिक प्रगति का प्रतीक है। सत्रों के समानांतर, अंतरराष्ट्रीय मामलों की संसदीय समितियों के अध्यक्षों की एक विशेष बैठक भी होगी, ताकि आपसी विश्वास और संसदीय सहयोग को और मजबूत किया जा सके।