नई दिल्ली में 12वां ब्रिक्स संसदीय फोरम संपन्न, आतंकवाद और वैश्विक सुधारों पर बनी सहमति
नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम का समापन हुआ, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और UNSC सुधारों पर सहमति बनी।

देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 12वां ब्रिक्स संसदीय फोरम मंगलवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा उद्घाटन किए गए इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का समापन एक संयुक्त घोषणापत्र (Joint Declaration) को अपनाने के साथ हुआ। इस घोषणापत्र के जरिए सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, संप्रभु समानता, आपसी सम्मान और आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस फोरम में नई दिल्ली की रणनीतिक प्राथमिकताओं को प्रमुखता मिली। घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों का पुरजोर समर्थन किया गया है, ताकि वैश्विक शासन में 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सके। राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भारत को बड़ी कामयाबी मिली है, क्योंकि घोषणापत्र में सीमा पार आतंकवाद, टेरर फंडिंग और आतंकवादियों को पनाह देने वाले सुरक्षित ठिकानों की कड़ी निंदा की गई है। इसमें स्पष्ट रूप से 'जीरो टॉलरेंस' की नीति और दोहरे मानकों को खत्म करने की मांग की गई है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI गवर्नेंस पर जोर
इस सम्मेलन के दौरान भारत द्वारा संचालित विकासात्मक और जलवायु एजेंडे को भी शामिल किया गया। इसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के विस्तार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नैतिक शासन पर सहमति बनी। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर 'साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों' (CBDR-RC) के सिद्धांत का पालन करने पर जोर दिया गया। सभी सदस्य देशों ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का एकमत से समर्थन किया।
समापन भाषण के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दुनिया के सामने मौजूद अस्थिरता, आर्थिक अनिश्चितता और क्षेत्रीय संघर्षों पर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थायी समाधान युद्ध या प्रतिस्पर्धा से नहीं, बल्कि संवाद, शांति और सहयोग से ही निकल सकते हैं। बिरला ने कहा कि वैश्विक शांति का असली अर्थ सुरक्षा, सम्मान, न्याय और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना है।
संसदों की बदलती भूमिका पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि संसदें केवल कानून बनाने वाली संस्थाएं नहीं हैं, बल्कि वे संवाद, जवाबदेही और जन-विश्वास के केंद्र हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनने के लिए आधुनिक डिजिटल उपकरणों और AI का उपयोग किया जाना चाहिए, बशर्ते वे मानवीय मूल्यों और नैतिकता के दायरे में हों। अंत में, उन्होंने वर्ष 2027 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने जा रहे चीन को शुभकामनाएं दीं और विश्वास जताया कि यह सहयोग आगे भी जारी रहेगा।