LA 2028 ओलंपिक की तैयारी: खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मिले पूर्व वर्ल्ड बॉक्सिंग प्रेसिडेंट
पूर्व वर्ल्ड बॉक्सिंग प्रेसिडेंट बोरिस वैन डेर वोर्स्ट ने खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की। लक्ष्य है LA 2028 ओलंपिक में पदक जीतना।

भारतीय मुक्केबाजी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने और 2028 के लॉस एंजिल्स (LA 2028) ओलंपिक में पदक की झोली भरने के लिए अब से ही रणनीति तैयार की जा रही है। इसी सिलसिले में वर्ल्ड बॉक्सिंग के पूर्व अध्यक्ष बोरिस वैन डेर वोर्स्ट ने नई दिल्ली में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) के अध्यक्ष अजय सिंह से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य केंद्र भारत की मौजूदा प्रगति और ओलंपिक के लिए भविष्य की तैयारी रही।
मुलाकात के दौरान खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भारतीय मुक्केबाजी महासंघ और उसके नेतृत्व पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने हाल के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में जो शानदार प्रदर्शन किया है, उसे अब ओलंपिक पदकों में बदलने की जरूरत है। मंत्री मांडविया ने स्पष्ट किया कि सरकार और देश की 140 करोड़ की आबादी भारतीय मुक्केबाजों के साथ खड़ी है और उनके सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव समर्थन देगी।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का बढ़ता दबदबा
बोरिस वैन डेर वोर्स्ट ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग रिंग में एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है। उन्होंने एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के ऐतिहासिक प्रदर्शन का जिक्र किया, जिसने यह साबित कर दिया है कि भारतीय मुक्केबाजों में प्रतिभा और दृढ़ संकल्प की कोई कमी नहीं है।
- एशियाई खेल: भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल छह पदक जीते, जिनमें तीन स्वर्ण और तीन कांस्य शामिल थे। लवलिना बोरगोहेन, परवीन हुड्डा और अंकुश पांगल ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया।
- कॉमनवेल्थ गेम्स: ग्लासगो में हुए खेलों में भारत का प्रदर्शन अब तक का सबसे बेहतरीन रहा, जहां मुक्केबाजों ने 10 पदक (7 स्वर्ण और 3 रजत) हासिल किए।
वैन डेर वोर्स्ट ने इस बात पर जोर दिया कि केवल क्षमता होना काफी नहीं है, बल्कि LA 2028 में सफलता पाने के लिए एथलीटों, कोचों, महासंघ और सरकार को एक टीम की तरह मिलकर काम करना होगा। उन्होंने खेल मंत्री के संदेश को दोहराते हुए कहा कि जब भारतीय मुक्केबाज 2028 में रिंग में उतरें, तो उन्हें महसूस होना चाहिए कि पूरा देश उनके पीछे खड़ा है। अब समय आ गया है कि इस क्षमता को ओलंपिक गौरव में बदला जाए।