Blinkit Ambulance अब नॉन-इमरजेंसी ट्रांसफर के लिए लेगा 2,500 रुपये, फ्री सेवा का हो रहा था गलत इस्तेमाल

Blinkit Ambulance ने नॉन-इमरजेंसी ट्रांसफर के लिए 2,500 रुपये शुल्क तय किया है ताकि गंभीर मरीजों के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध रहें।

Kittu Kumari5 November 20262 min read0 viewsNational
Blinkit Ambulance अब नॉन-इमरजेंसी ट्रांसफर के लिए लेगा 2,500 रुपये, फ्री सेवा का हो रहा था गलत इस्तेमाल

मेडिकल इमरजेंसी में जान बचाने वाली Blinkit Ambulance सेवा अब नॉन-इमरजेंसी ट्रांसफर के लिए शुल्क लेना शुरू करने जा रही है। कंपनी ने फैसला किया है कि रूटीन हॉस्पिटल विजिट और घर से अस्पताल जाने जैसे गैर-आपातकालीन मामलों के लिए अब 2,500 रुपये चार्ज किए जाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि गंभीर मरीजों के लिए पूरी तरह सुसज्जित एम्बुलेंस समय पर उपलब्ध रहें और मुफ्त सेवाओं का गलत इस्तेमाल न हो।

Eternal के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन (Emergency) ट्रांसफर पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे, जैसा कि अब तक था। नॉन-इमरजेंसी मामलों के लिए शुल्क यात्रा पूरी होने के बाद लिया जाएगा। गोयल के अनुसार, यह राशि मोटे तौर पर निजी एम्बुलेंस ऑपरेटरों द्वारा लिए जाने वाले शुल्क के समान ही है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

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दीपिंदर गोयल ने बताया कि पिछले दो वर्षों में इस सेवा ने करीब 42,000 केस संभाले हैं, जिनमें से लगभग 20,000 इमरजेंसी केस थे और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया गया। हालांकि, अब यह देखा गया कि बड़ी संख्या में बुकिंग्स रूटीन चेकअप, अस्पताल जाने या अस्पताल से घर वापस आने के लिए की जा रही थीं। ऐसे काम आसानी से उबर या किसी अन्य निजी वाहन से किए जा सकते थे।

गोयल ने जोर देकर कहा कि जब एक पैरामेडिक्स से लैस इमरजेंसी एम्बुलेंस किसी रूटीन काम में लगी होती है, तो वह उस समय सड़क से हट जाती है जब उसकी जरूरत किसी गंभीर मरीज को हो सकती है। ऐसे में यह बदलाव जरूरी हो गया था।

नॉन-इमरजेंसी ट्रांसफर से इकट्ठा किया गया पैसा 'Eternal Foundation' को जाएगा, जो इस एम्बुलेंस सेवा का संचालन करता है। इस फंड का उपयोग सेवाओं के विस्तार के लिए किया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य अगले दो से चार वर्षों में Blinkit Ambulance सेवाओं को भारत के सभी प्रमुख शहरों में ले जाना है। गोयल ने यह भी बताया कि उच्च गुणवत्ता वाली एम्बुलेंस सेवाओं के विस्तार में सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षित और सहानुभूति रखने वाले पैरामेडिक्स की कमी है, जिसके लिए उनकी ट्रेनिंग एकेडमी तेजी से काम कर रही है।

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