'रिजीम चेंज' जबरन और अलोकतांत्रिक है, अराजकता के खिलाफ एकजुट हों लोग: प्रदीप भंडारी

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने उन लोगों पर तीखा हमला बोला है जो हिंसक विरोध प्रदर्शनों को सही ठहराते हैं। भंडारी ने चेतावनी दी है कि इस तरह के प्रदर्शन केवल असंतोष व्यक्त करने का जरिया नहीं हैं, बल्कि इनका असली मकसद 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन करना है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए कहा कि दुनिया भर में जो अराजकता देखी जा रही है, वह भारत के उन लोगों के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए जो हिंसा को महिमामंडित करते हैं।
प्रदीप भंडारी ने तर्क दिया कि सामाजिक और राजनीतिक इतिहास का अध्ययन करने वाला कोई भी व्यक्ति जानता है कि जबरन सत्ता परिवर्तन हमेशा हिंसक और अलोकतांत्रिक होता है। उन्होंने लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे अराजक तत्वों के खिलाफ एकजुट हों।
बांग्लादेश जैसी स्थिति की आशंका और राजनीतिक घमासान
बीजेपी का यह कड़ा रुख ऐसे समय में आया है जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेरा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली में आयोजित विभिन्न सम्मेलनों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 'रिजीम चेंज' शब्द का इस्तेमाल किया है। यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चुनावी रोल के विशेष गहन संशोधन (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है।
हैरानी की बात यह है कि छात्र कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश में हुए उस राजनीतिक विद्रोह का जिक्र भी किया, जिसमें प्रधानमंत्री शेख हसीना को गद्दी छोड़नी पड़ी थी। वहीं, दिल्ली की सड़कों पर तिरंगा मार्च निकालकर विरोध जताए जा रहे विपक्षी दलों और नागरिक समूहों पर बीजेपी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक आंदोलन के लिए राष्ट्रीय ध्वज को एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहा है और शहर के बीचों-बीच अराजकता फैला रहा है।
इस मामले में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मोर्चा संभाला है। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर आरोप लगाया कि वे भारत में बांग्लादेश जैसी राजनीतिक उथल-पुथल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के युवाओं को अराजक राजनीति का मोहरा बनाया जा रहा है और चुनावी सुधारों के नाम पर वास्तव में देश में अशांति फैलाने और सत्ता पलटने की साजिश रची जा रही है।