इंडिया गठबंधन की 'चलो दिल्ली' रैली पर भड़के जेपी नड्डा, बताया महज एक 'राजनीतिक नाटक'

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इंडिया गठबंधन की 'चलो दिल्ली' रैली की कड़ी आलोचना की और इसे अराजकता फैलाने की साजिश बताया।

Kittu Kumari1 November 20262 min read0 viewsDelhi Local
इंडिया गठबंधन की 'चलो दिल्ली' रैली पर भड़के जेपी नड्डा, बताया महज एक 'राजनीतिक नाटक'

दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन द्वारा आयोजित 'चलो दिल्ली' रैली को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस आयोजन पर तीखा हमला बोलते हुए इसे एक "राजनीतिक नाटक" और "मूर्खतापूर्ण कार्य" करार दिया है। नड्डा का आरोप है कि बार-बार चुनाव हारने वाले राजनीतिक दल अब देश में अराजकता फैलाने और चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यह भारत है, कोई 'बनाना रिपब्लिक' नहीं, जहां कोई भी अपनी मर्जी से दंगे और आगजनी करवा ले।

जेपी नड्डा ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए इसे चार चरणों वाला मॉडल बताया। उनके अनुसार, विपक्ष पहले चुनावी प्रक्रियाओं के बारे में झूठी बातें फैलाता है, फिर प्रशासन को ठप करने के लिए सड़कों पर प्रदर्शन करता है, त्योहारों के दौरान बाजारों को बंद करवाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाता है और अंत में विदेशी ताकतों के इशारे पर सरकार को गिराने की कोशिश करता है।

1984 के दंगों की याद दिलाने पर जताया कड़ा ऐतराज

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बीजेपी अध्यक्ष ने रैली की तारीख यानी 1 नवंबर को चुनने पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने याद दिलाया कि यह दिन 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी है। नड्डा ने इस समय चुनाव को लोकतांत्रिक इतिहास का "काला धब्बा" बताते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी इस रैली के जरिए सिख समुदाय के जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं।

बता दें कि यह रैली मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) में कथित गड़बड़ियों के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और फारूक अब्दुल्ला जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास से मिंटो रोड तक खुली बस में गए और फिर पैदल चलकर रामलीला मैदान पहुंचे।

सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली पुलिस ने इस रैली के लिए कड़े इंतजाम किए थे। करीब 4,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे और पूरी निगरानी के लिए 200 से 250 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। प्रशासन ने एनओसी (NOC) के तहत यह शर्त रखी थी कि रैली शाम 5 बजे तक समाप्त हो जानी चाहिए और मैदान में रात रुकने की अनुमति नहीं होगी।

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