पर्पल अंब्रेला फेस्टिवल 2026: बिसलेरी ने दिल्ली में सिखाया प्लास्टिक कचरे से संसाधन बनाने का तरीका

राजधानी दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में 6 और 7 अक्टूबर, 2026 को आयोजित पर्पल अंब्रेला फेस्टिवल 2026 में पर्यावरण संरक्षण और वेस्ट मैनेजमेंट की एक अनूठी झलक देखने को मिली। इस इवेंट में बिसलेरी इंटरनेशनल ने 'ऑफिशियल हाइड्रेशन पार्टनर' के तौर पर हिस्सा लिया और लोगों को प्लास्टिक कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन के प्रति जागरूक किया। 'AI और क्लाइमेट: रीइमेजिनिंग द फ्यूचर टुगेदर' थीम पर आधारित इस फेस्टिवल में स्कूल के छात्रों, शिक्षकों, जलवायु विशेषज्ञों और इनोवेटर्स समेत 1,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए।
पर्पल अंब्रेला फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा और नवाचार के जरिए दस लाख युवा जलवायु चैंपियनों को तैयार करना है। फेस्टिवल डायरेक्टर नीरज कुमार और सह-संस्थापक गौरी के नेतृत्व में छात्रों को 'थिएटर फॉर क्लाइमेट चैंपियनशिप' जैसे प्लेटफॉर्म दिए गए, ताकि वे कला और प्रदर्शन के जरिए प्लास्टिक प्रदूषण और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी बात रख सकें।
प्लास्टिक कचरे से बनीं 'सपनों की बेंच' और कलाकृतियां
बिसलेरी इंटरनेशनल ने अपने 'बॉटल्स फॉर चेंज' अभियान के जरिए इस इवेंट में सर्कुलरिटी का संदेश दिया। कंपनी ने वहां 'ग्रीनर प्रॉमिस' एक्सपीरियंस पेश किया, जिसमें लोगों का ध्यान खींचने वाली दो खास चीजें थीं। पहली थी 'विंग्स ऑफ चेंज' नाम की एक आर्ट इंस्टॉलेशन, जिसे 2,000 इस्तेमाल की गई पीईटी बोतलों से बनाया गया था। वहीं, रिसाइकिल प्लास्टिक से तैयार की गई 'बेंचेस ऑफ ड्रीम्स' ने यह साबित किया कि जिसे हम कचरा समझते हैं, वह वास्तव में एक मूल्यवान संसाधन हो सकता है।
बिसलेरी इंटरनेशनल के सीईओ डॉ. एंजेलो जॉर्ज ने कहा कि इस पहल का मकसद युवाओं को यह प्रेरित करना है कि वे प्लास्टिक कचरे को कूड़े के बजाय एक रिकवरेबल रिसोर्स (पुनर्प्राप्त संसाधन) के रूप में देखें। गौरतलब है कि बिसलेरी का 'बॉटल्स फॉर चेंज' प्रोग्राम दिल्ली, एनसीआर, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में सक्रिय है, जिसने अब तक 13,905 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल करने में मदद की है। इसी सीएसआर उत्कृष्टता के लिए कंपनी को हाल ही में महात्मा अवार्ड 2026 से भी नवाजा गया है।