"सब सफेद झूठ है": JNU जांच पर बिमोल अकोईजम का पलटवार, प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में यौन उत्पीड़न के आरोपों और उसके बाद हुई बर्खास्तगी को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजम ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जांच प्रक्रिया को पूरी तरह दोषपूर्ण बताया है। अकोईजम का आरोप है कि प्रशासन ने न केवल नियमों की अनदेखी की, बल्कि उनकी गोपनीयता भंग कर मीडिया ट्रायल भी करवाया।
सांसद बिमोल अकोईजम ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें आंतरिक समिति (IC) से 9 तारीख को एक ईमेल मिला, जिसमें बताया गया कि जांच पूरी हो चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच रिपोर्ट और सिफारिशें सामने आती हैं, तो वह संबंधित पक्षों को दी जानी चाहिए, लेकिन उन्हें वह रिपोर्ट नहीं सौंपी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट मिलने से पहले ही कुलपति (VC) द्वारा उनकी बर्खास्तगी का नोटिस जारी कर दिया गया, जो कानूनी प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है।
POSH एक्ट के उल्लंघन और मीडिया ट्रायल का आरोप
अकोईजम ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि POSH एक्ट की धारा 16 के तहत इन रिपोर्टों को गोपनीय रखा जाना चाहिए था, लेकिन प्रशासन ने उनकी पहचान उजागर कर दी। उन्होंने कहा, "मुझे अपील करने के लिए रिपोर्ट तक नहीं दी गई, लेकिन मेरा नाम पहले ही लीक कर दिया गया ताकि जनता में उनके प्रति नफरत पैदा हो। यह पूरी तरह से मीडिया ट्रायल था।" उन्होंने कुलपति पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह मीडिया में जाकर "सफेद झूठ" बोल रही हैं।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब JNU की 11 छात्राओं ने बिमोल अकोईजम पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। इसके बाद विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने जांच की और कड़ी सजा की सिफारिश की, जिसके आधार पर 9 अक्टूबर को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। अकोईजम ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।
इस मामले ने अब कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है। दिल्ली पुलिस ने वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। वहीं, भाजपा की महिला सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।