बीकानेर हाउस में प्रदर्शन की तस्वीरें हटाने का दबाव, रॉबर्ट वाड्रा और कांग्रेस सांसदों ने जताया विरोध

दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित एक आर्ट एग्जीबिशन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रायहान वाड्रा की प्रदर्शनी 'नो आइडिया इज फाइनल' (No Idea Is Final) से दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरों को हटाने के लिए कथित तौर पर दबाव डाला गया। इस मामले में अब रॉबर्ट वाड्रा और कांग्रेस के कई दिग्गज सांसदों ने मोर्चा खोल दिया है और इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है।
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब रायहान वाड्रा ने सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाया कि प्रदर्शनी शुरू होने से महज कुछ घंटे पहले बीकानेर हाउस प्रबंधन ने उन्हें अपनी कलाकृतियों में से कई तस्वीरों को हटाने के लिए मजबूर किया। रायहान के मुताबिक, प्रबंधन ने दिल्ली के युवाओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरों को 'आपत्तिजनक' माना। इतना ही नहीं, उनसे भारतीय तिरंगे वाली दो तस्वीरों को हटाने के लिए भी कहा गया। हालांकि, रायहान ने तिरंगे की तस्वीरों को हटाने से साफ इनकार कर दिया, जिसके चलते प्रदर्शनी अब सीमित क्षमता के साथ आयोजित की जा रही है।
कांग्रेस सांसदों ने सरकार पर लगाया सेंसरशिप का आरोप
इस घटना के बाद कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह शासन इतना डरा हुआ है कि उसे प्रदर्शनों की तस्वीरों से भी खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब तिरंगा भी सेंसर की कैंची से सुरक्षित नहीं है, तो समस्या कला में नहीं बल्कि शासन की मानसिकता में है। खेड़ा ने इस स्थिति को सेंसरशिप का एक डरावना उदाहरण बताया, जहां दीवारों पर कला की जगह सिर्फ लोहे की कीलें रह गईं।
वहीं, सांसद कार्ती चिदंबरम ने बीकानेर हाउस के प्रबंधन के व्यवहार को 'अजीब' और 'अशिष्ट' करार दिया। भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के लीगल सेल ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि आप फ्रेम को सेंसर कर सकते हैं, लेकिन सच्चाई को नहीं। रायहान वाड्रा ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी कला और देश के ध्वज के सम्मान से समझौता नहीं करेंगे और जल्द ही इन तस्वीरों को प्रदर्शित करने के लिए किसी वैकल्पिक स्थान की तलाश करेंगे।