दिल्ली-NCR में प्रदूषण मिटाने के लिए स्टार्टअप्स की मदद लेंगे केंद्र, AI और ड्रोन तकनीक का होगा इस्तेमाल

दिल्ली-NCR में हर साल बढ़ने वाले वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए अब सरकार तकनीक और इनोवेशन का सहारा ले रही है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को कई टेक इनोवेटर्स और स्टार्टअप्स के साथ एक अहम बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य मकसद दिल्ली-NCR के लिए ऐसे किफायती और बड़े पैमाने पर लागू होने वाले समाधान खोजना था, जो हवा को साफ करने में कारगर साबित हों।
यह पूरी कवायद 'साफ हवा में हिस्सेदारी, हम सभी की है जिम्मेदारी' अभियान के तहत की गई है। बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स के जरिए प्रदूषण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और उसके नियंत्रण को और अधिक मजबूत बनाया जाए।
इन 9 चुनौतियों पर काम करेंगे स्टार्टअप्स
मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रदूषण प्रबंधन के अलग-अलग पहलुओं को कवर करते हुए स्टार्टअप्स के सामने नौ मुख्य 'प्रॉब्लम स्टेटमेंट्स' रखे। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे शामिल हैं:
- औद्योगिक उत्सर्जन और वाहनों से निकलने वाला धुआं।
- निर्माण कार्यों और सड़कों से उड़ने वाली धूल।
- फसलों के अवशेष (पराली) जलाना।
- कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) की समस्या।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब केवल निगरानी काफी नहीं है, बल्कि सख्ती से नियमों को लागू करना जरूरी है। इसके लिए ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) के डेटा को प्लांट ऑपरेशन डेटा के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि AI की मदद से किसी भी तरह की गड़बड़ी या अवैध उत्सर्जन का तुरंत पता लगाया जा सके।
चर्चा के दौरान कई आधुनिक सुझाव भी सामने आए, जिनमें छेड़छाड़-मुक्त (टैम्पर-प्रूफ) PUC टेस्टिंग सिस्टम, हाइपरलोकल एयर-क्वालिटी मॉनिटरिंग और पूरे शहर की प्रदूषण मैपिंग व फोरकास्टिंग जैसे उपाय शामिल थे। इसके अलावा, निर्माण और विध्वंस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और पराली के भंडारण के लिए नए इन-सिटु मॉडल अपनाने की बात भी कही गई।
इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह और दिल्ली के पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा भी मौजूद रहे। साथ ही, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। भूपेंद्र यादव ने कहा कि इस तरह के संवाद से नीति निर्माताओं और इनोवेटर्स के बीच की दूरी कम होगी, जिससे शासन में पारदर्शिता और एकरूपता आएगी।