दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने के लिए सरकार का नया प्लान, स्टार्टअप्स की तकनीक से मिलेगी मदद

दिल्ली और एनसीआर में हर साल बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अब सरकार तकनीक और इनोवेशन का सहारा ले रही है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को कई स्टार्टअप्स और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ एक खास बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य मकसद ऐसे सस्ते और असरदार समाधान खोजना था जिन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके। यह पूरी कवायद 'साफ हवा में हिस्सेदारी, हम सभी की है जिम्मेदारी' अभियान के तहत की गई, ताकि नीति बनाने वालों और तकनीक विकसित करने वालों के बीच की दूरी को खत्म किया जा सके।
बैठक के दौरान मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए अब केवल पुराने तरीके काफी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के जरिए नियमों का उल्लंघन करने वालों को आसानी से पकड़ा जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि फैक्ट्रियों के उत्सर्जन डेटा को उनके ऑपरेशनल डेटा के साथ जोड़ा जाए, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या धोखाधड़ी को तुरंत पहचाना जा सके।
AI और ड्रोन से होगी प्रदूषण की निगरानी
इस चर्चा में प्रदूषण के नौ मुख्य क्षेत्रों पर फोकस किया गया, जिनमें औद्योगिक उत्सर्जन, गाड़ियों का धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, सड़क की धूल, पराली जलाना और कचरा प्रबंधन शामिल हैं। स्टार्टअप्स ने कई आधुनिक समाधान पेश किए, जिनमें शामिल हैं:
- AI आधारित पहचान: फैक्ट्रियों द्वारा नियमों के उल्लंघन को पकड़ने के लिए AI का इस्तेमाल।
- स्मार्ट PUC सिस्टम: प्रदूषण जांच (PUC) के लिए ऐसा सिस्टम जो पूरी तरह टेंपर-प्रूफ हो।
- ड्रोन और सैटेलाइट: पराली और खुले में कचरा जलाने की 24 घंटे निगरानी के लिए ड्रोन और रिमोट सेंसिंग तकनीक।
- हाइपरलोकल मॉनिटरिंग: शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण के हॉटस्पॉट की सटीक मैपिंग।
- ट्रैफिक मैनेजमेंट: जाम कम करने के लिए प्रेडिक्टिव ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम ताकि गाड़ियों का धुआं कम हो।
पराली की समस्या पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि धान के पुआल के भंडारण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने कृषि मंत्रालय और CPCB के साथ मिलकर एक ऐसा मॉडल विकसित करने की बात कही, जिससे पराली को जलाने के बजाय उसे बायो-एनर्जी, खाद या अन्य उपयोगी उत्पादों में बदला जा सके। इसके अलावा, निर्माण और विध्वंस (C&D) कचरे के पुनर्चक्रण (Recycle) को बढ़ावा देने और उसे निर्माण क्षेत्र की मांग से जोड़ने पर भी चर्चा हुई।
इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह और दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। भूपेंद्र यादव ने स्टार्टअप्स से अपील की कि वे अपनी तकनीक को जमीनी जरूरतों के हिसाब से ढालें ताकि उन्हें जल्द से जल्द दिल्ली-NCR की सड़कों और फैक्ट्रियों में लागू किया जा सके।