केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और सीएम रेखा गुप्ता ने दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने की कार्ययोजना की समीक्षा की

दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सोमवार को एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सर्दियों के मौसम से पहले और दौरान उठाए जाने वाले कदमों की प्रगति की समीक्षा की गई। ANI के अनुसार, बैठक में पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सरसा और लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के अलावा कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
हॉटस्पॉट और जन भागीदारी अभियान
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 10 अक्टूबर तक दिल्ली के 37 पहचाने गए हॉटस्पॉट पर जन भागीदारी कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। इन सभी जगहों के लिए विशेष कार्य बिंदु तय किए जाएंगे और उनके काम पर कड़ी नजर रखी जाएगी। जनप्रतिनिधि इन इलाकों का दौरा करके धरातल पर प्रदूषण रोकने के उपायों की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा कृषि गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री और एनसीआर राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ बैठक करने पर भी जोर दिया गया।
सख्त नियम और तकनीकी उपाय
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई कदम उठा रही है और योजनाओं का जमीन पर उतरना बहुत जरूरी है। बैठक में यह फैसला लिया गया कि सभी 500 एएनपीआर-सक्षम ईंधन स्टेशनों पर मिशन मोड में 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' नियम लागू किया जाएगा। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली मेट्रो सारथी ऐप का प्रचार किया जाएगा। निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के लिए कैमरों का उपयोग और श्मशान घाटों पर आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया।
सर्दियों के लिए विशेष रणनीति और प्रतिबंध
आगामी सर्दियों के मौसम से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत वाहन से निकलने वाले धुएं, सड़क और निर्माण कार्य की धूल, कचरा जलाने और औद्योगिक प्रदूषण पर रोक लगाई जाएगी। एक नवंबर से दिल्ली में बीएस-6 मानकों से नीचे के बाहरी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर भी सर्दियों के दौरान खास पाबंदियां रहेंगी। प्रदूषण से निपटने के लिए एआई-सक्षम कमांड और कंट्रोल सेंटर को सक्रिय किया जाएगा और निगरानी टीमों की संख्या बढ़ाई जाएगी।