अनुमति लेकर कर सकते हैं विरोध प्रदर्शन, सरकार ने दिए बड़े विकल्प: भूपेंद्र यादव
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी बरकरार है और विरोध प्रदर्शन के लिए बड़े विकल्प दिए गए हैं।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति या समूह अनुमति लेकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार (अनुच्छेद 19) पूरी तरह बरकरार है और इसे केवल संवैधानिक आपातकाल की स्थिति में ही निलंबित किया जा सकता है।
भूपेंद्र यादव ने सवाल किया कि आखिर प्रदर्शन करने से किसने रोका है? उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों की सुविधा के लिए पहले से ही बड़े स्थलों की अनुमति दी है। मंत्री ने 1975 के आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में अखबारों के संपादकीय खाली छपे थे, लेकिन उसके बाद ऐसा कभी नहीं हुआ। उन्होंने साफ किया कि यदि किसी को कुछ करना है, तो वह अनुमति ले सकता है और अनुमति मिलने पर वह प्रदर्शन कर सकता है।
जंतर मंतर और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश
प्रदर्शन स्थलों पर चर्चा करते हुए उन्होंने 2018 के एक मामले का हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शनों के लिए कुछ सीमाएं तय की थीं। यह मामला मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) द्वारा दायर किया गया था, जिसमें जंतर मंतर और मध्य दिल्ली में प्रदर्शनों पर लगी पूरी तरह पाबंदी को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने पूरी तरह पाबंदी को गलत ठहराते हुए दिल्ली पुलिस को दिशा-निर्देश जारी करने के आदेश दिए थे, ताकि स्थानीय लोगों को परेशानी न हो और मौलिक अधिकारों का भी सम्मान हो। इसके बाद जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या 1,000 तक सीमित की गई और समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक तय किया गया।
भूपेंद्र यादव ने आगे कहा कि बड़े स्तर के प्रदर्शनों को देखते हुए केंद्र सरकार ने विकल्प दिए हैं। उन्होंने बताया कि रामलीला मैदान के अलावा तीन अन्य वैकल्पिक स्थल दिए गए हैं। उन्होंने कहा, "जब लोगों ने कहा कि उन्हें अधिक जगह चाहिए, तो सरकार ने उन्हें बड़ा स्थान उपलब्ध कराया। हम लोकतंत्र से निकले लोग हैं, फिर सरकार इनकार क्यों करेगी?"