दिल्ली में सजेगा चावल का महाकुंभ, भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026 की तैयारी तेज

दिल्ली के भारत मंडपम में 23 अक्टूबर से भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026 शुरू होगी, जिसमें 153 देशों के खरीदार जुटेंगे।

Kittu Kumari22 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में सजेगा चावल का महाकुंभ, भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026 की तैयारी तेज

देश की राजधानी दिल्ली जल्द ही दुनिया भर के चावल व्यापारियों और विशेषज्ञों का केंद्र बनने जा रही है। आगामी 23 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक भारत मंडपम में भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के साथ-साथ एपीडा (APEDA) का पूरा समर्थन प्राप्त है। इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य मकसद भारतीय चावल के लिए वैश्विक स्तर पर नए बाजारों की तलाश करना और साल 2027 के लिए निर्यात रणनीतियों को तैयार करना है।

इस आयोजन को लेकर उत्साह का आलम यह है कि अब तक 32,467 पंजीकरण हो चुके हैं, जिनमें 153 अलग-अलग देशों के 4,856 अंतरराष्ट्रीय खरीदार शामिल हैं। यह आयोजन न केवल व्यापारिक समझौतों का मंच बनेगा, बल्कि भारत के 23 राज्यों के प्रतिनिधि भी यहां जुटकर वैश्विक प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पहले ही 2,038 बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) मीटिंग्स तय की जा चुकी हैं। खास बात यह है कि प्रदर्शनी के लिए उपलब्ध जगह लगातार दूसरे साल पूरी तरह बिक चुकी है, जो इस इवेंट की भारी डिमांड को दर्शाता है।

2027 के बाजार और निर्यात चुनौतियों पर होगी चर्चा

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कॉन्फ्रेंस के दौरान नौ ज्ञान सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 65 विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। इस बार चर्चा का मुख्य केंद्र "ग्लोबल राइस डिमांड एंड सप्लाई आउटलुक 2027" रहेगा, जिसमें यह विश्लेषण किया जाएगा कि आने वाले समय में कीमतों में गिरावट आएगी या फिर एक नई तेजी देखने को मिलेगी। साथ ही, 2027 के लिए उन टॉप 10 बाजारों की पहचान की जाएगी, जहां भारतीय चावल की सबसे ज्यादा संभावना है।

IREF के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देव गर्ग ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि उद्योग केवल मात्रा (वॉल्यूम) बढ़ाने के बजाय वैल्यू क्रिएशन यानी मूल्य संवर्धन पर ध्यान दे। वहीं, पंजाब के IREF राज्य अध्यक्ष अमन सिंगल ने व्यावहारिक चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि एशिया और अफ्रीका में भारतीय चावल की कीमतें प्रतिस्पर्धी हैं, लेकिन धान की बढ़ती लागत, माल ढुलाई के खर्च और फसल की अनिश्चितता एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए अधिक पूर्वानुमानित नीतियों और कुशल लॉजिस्टिक्स की आवश्यकता पर बल दिया।

इस महत्वपूर्ण आयोजन को ईएंडवाई (E&Y) और एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) जैसे नॉलेज पार्टनर्स के साथ-साथ वाराणसी स्थित IRRI-SARC के रिसर्च सहयोग से सफल बनाने की तैयारी की जा रही है।

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