दिल्ली में भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026 संपन्न, 50 हजार करोड़ के व्यापार की उम्मीद

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राइस कॉन्फ्रेंस में 153 देशों के खरीदार जुटे, 50 हजार करोड़ के ट्रेड कॉन्ट्रैक्ट्स की उम्मीद।

Kittu Kumari25 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026 संपन्न, 50 हजार करोड़ के व्यापार की उम्मीद

देश की राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026 का शानदार समापन हो गया है। दो दिनों तक चले इस गहन व्यापारिक आयोजन में दुनिया भर के चावल उद्योग से जुड़े दिग्गजों ने हिस्सा लिया। इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य वैश्विक व्यापार संबंधों को मजबूत करना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना था। आयोजन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 153 देशों के करीब 4,856 अंतरराष्ट्रीय खरीदार शामिल हुए।

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) और एपीडा (APEDA) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में 180 से अधिक कंपनियों ने अपनी प्रदर्शनी लगाई। कॉन्फ्रेंस के दौरान व्यापारिक नेटवर्किंग को बढ़ावा देने के लिए EY की मदद से 2,038 प्री-शेड्यूल्ड B2B मीटिंग्स आयोजित की गईं, ताकि भारतीय निर्यातकों और विदेशी खरीदारों के बीच सीधा संवाद हो सके। कुल मिलाकर 32,467 लोगों ने इस इवेंट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 24,387 प्रतिभागियों ने मौके पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

भारतीय चावल निर्यात में आएगी बड़ी उछाल

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IREF के अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने इस आयोजन के आर्थिक प्रभाव पर चर्चा करते हुए बताया कि इस कॉन्फ्रेंस के जरिए लगभग 50,000 करोड़ रुपये (करीब 6 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के ट्रेड कॉन्ट्रैक्ट्स जेनरेट होने की उम्मीद है। उन्होंने एक बड़ा अनुमान लगाते हुए कहा कि भारत का चावल निर्यात इस साल बढ़कर 24 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल 20.5 मिलियन टन था। यह वृद्धि वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को एक भरोसेमंद ट्रेड हब के रूप में और मजबूत करेगी।

कॉन्फ्रेंस के दौरान केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक और मुनाफे पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए 'वैल्यू-ऐडेड' उत्पादों पर जोर दिया। चर्चा के मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार रहे:

  • राइस फोर्टिफिकेशन: डॉ. राज भंडारी ने चावल के फोर्टिफिकेशन की भूमिका पर प्रकाश डाला।
  • वेस्ट टू वेल्थ: डॉ. श्रुति श्रीवास्तव ने चावल के भूसे, छिलके और ब्रान जैसे कृषि अवशेषों से कमाई के नए रास्ते सुझाए।
  • प्रीमियम मार्केट: इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IRRI) के प्रियव्रत रॉय ने लो-ग्लाइसेमिक-इंडेक्स चावल की बढ़ती मांग और इसके प्रीमियम बाजार की संभावनाओं के बारे में बताया।

कार्यक्रम के आखिरी दिन आम जनता के लिए एक 'राइस फेस्टिवल' भी आयोजित किया गया। इस पूरे आयोजन में नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, एग्री-टेक फर्मों और वित्तीय संस्थानों ने मिलकर 2027 के बाजार परिदृश्य और सप्लाई चेन को अधिक कुशल बनाने की रणनीतियों पर मंथन किया।

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