फरीदाबाद: भाखरी से हटेगा कूड़ा, प्रतापगढ़ डंपिंग प्लांट की क्षमता बढ़ाई जाएगी: कृष्णपाल गुर्जर

केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने ऐलान किया है कि 20 नवंबर के बाद भाखरी से कूड़ा हटाया जाएगा और प्रतापगढ़ प्लांट की क्षमता बढ़ाई जाएगी।

Kittu Kumari27 October 20262 min read0 viewsNCR
फरीदाबाद: भाखरी से हटेगा कूड़ा, प्रतापगढ़ डंपिंग प्लांट की क्षमता बढ़ाई जाएगी: कृष्णपाल गुर्जर

फरीदाबाद के अरावली क्षेत्र में स्थित भाखरी गांव में कूड़ा डंपिंग यार्ड को लेकर चल रहा विवाद अब सुलझता नजर आ रहा है। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने साफ किया है कि 20 नवंबर के बाद भाखरी से कूड़ा हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह फैसला मंगलवार को सेक्टर-16 स्थित सर्किट हाउस में हुई एक अहम बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें नगर निगम कमिश्नर और स्थानीय विधायक मौजूद थे।

दरअसल, नगर निगम ने शहर के कचरे के निस्तारण के लिए भाखरी गांव में डंपिंग यार्ड बनाने की योजना तैयार की थी। लेकिन जैसे ही यहां कूड़ा डालना शुरू हुआ, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों का तर्क है कि कूड़े के ढेर से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होगा, बल्कि अरावली की प्राकृतिक हरियाली और पारिस्थितिकी को भी भारी नुकसान पहुंचेगा। इसी वजह से ग्रामीण 7 अक्टूबर से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और प्रशासन के साथ उनका गतिरोध बना हुआ था।

कूड़ा निस्तारण के लिए क्या है नई योजना?

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शहर में कचरा प्रबंधन की समस्या को देखते हुए मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने वैकल्पिक समाधान पेश किए हैं। उन्होंने बताया कि सेक्टर-56 के प्रतापगढ़ में स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र, जिसकी वर्तमान क्षमता 500 टन प्रतिदिन है, उसे बढ़ाकर 750 टन प्रतिदिन किया जाएगा। इसके साथ ही मुजेरी में 200 टन क्षमता का प्लांट पहले से ही कार्यरत है।

मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि शहर के बड़े कलेक्शन पॉइंट्स पर आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी, ताकि कूड़े का निस्तारण उसी स्थान पर किया जा सके और उसे दूर ले जाने की जरूरत कम हो। इससे भाखरी में जमा कचरे को हटाने का रास्ता साफ होगा।

गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी फरीदाबाद से रोजाना लगभग 1200 टन कचरा निकलता है। बंधवाड़ी में कूड़ा फेंकने पर पाबंदी लगने के बाद निगम के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। प्रतापगढ़ और नचौली जैसे केंद्रों पर पहले से ही कूड़े के पहाड़ खड़े हैं, जिससे स्थिति काफी जटिल हो गई थी। अब उम्मीद है कि क्षमता विस्तार और मशीनीकरण से इस समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा।

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