BFI में बगावत: अध्यक्ष अजय सिंह को हटाने की मांग, 27 राज्य इकाइयों ने खोला मोर्चा

भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) के अध्यक्ष अजय सिंह के खिलाफ 27 राज्य इकाइयों ने मोर्चा खोल दिया है। वे पारदर्शिता और सुधारों की मांग कर रहे हैं।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsNational
BFI में बगावत: अध्यक्ष अजय सिंह को हटाने की मांग, 27 राज्य इकाइयों ने खोला मोर्चा

भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) के भीतर गहराता विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह के कामकाज के तरीके से नाराज होकर देश भर की 27 राज्य इकाइयों और कई पदाधिकारियों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित एक होटल में हुई बैठक के बाद इन प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे महासंघ में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया चाहते हैं।

इस बैठक में दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, गोवा, असम, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा और झारखंड सहित 27 राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। साथ ही, कार्यकारी समिति के 13 में से 8 सदस्यों ने भी अजय सिंह को हटाने की मांग का समर्थन किया है। आरोप है कि महासंघ का कामकाज पूरी तरह से केंद्रीकृत हो गया है और राज्य संघों की अहम फैसलों में कोई भूमिका नहीं रह गई है।

'वन-मैन शो' बन गया है फेडरेशन: पदाधिकारियों के गंभीर आरोप

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BFI के महासचिव प्रमोद कुमार ने कड़े शब्दों में कहा कि फेडरेशन अब एक "वन-मैन ऑर्गनाइजेशन" बन गया है। वहीं, दिल्ली एमेच्योर बॉक्सिंग एसोसिएशन (DABA) के उपाध्यक्ष रोहित जैनेंद्र जैन ने आरोप लगाया कि जो भी व्यक्ति अध्यक्ष की बातों से असहमत होता है, उसे निशाना बनाया जाता है और उसके पद से हटाने की कोशिश की जाती है। जैन ने साफ किया कि उनकी प्राथमिकता फिलहाल BFI को अजय सिंह के नियंत्रण से मुक्त कराना और भारतीय मुक्केबाजी के हितों की रक्षा करना है।

मध्य प्रदेश राज्य संघ के प्रतिनिधि दिग्विजय सिंह ने नेतृत्व तक पहुंच की कठिनाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रतिनिधियों को अध्यक्ष से मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, जो इस बात का प्रमाण है कि नेतृत्व आम सदस्यों से कटा हुआ है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय खेल मंत्री और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा को एक ज्ञापन सौंपा है। हालांकि, BFI के अंतरिम उपाध्यक्ष राजेश भंडारी ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए उन्होंने फिलहाल कोई अविश्वास प्रस्ताव या विशेष आम बैठक (SGM) आयोजित नहीं की है। अब सभी की नजरें 13 नवंबर को आने वाले अदालत के फैसले पर टिकी हैं, जिसके बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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