बारापूला फेज-3 पर ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए नई व्यवस्था, एंट्री पॉइंट्स पर तैनात हुई पुलिस

दिल्ली के commuters के लिए सफर आसान बनाने के मकसद से शुरू किया गया बारापूला फेज-3 अब खुद जाम का कारण बन गया है। मयूर विहार से एम्स के बीच की दूरी कम करने के लिए बनाए गए इस कॉरिडोर पर भारी भीड़ और बॉटलनेक की समस्या को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने अब वाहनों की एंट्री को रेगुलेट करना शुरू कर दिया है। पुलिस अब धीरे-धीरे वाहनों को कॉरिडोर पर भेज रही है ताकि आगे जाकर भारी जाम की स्थिति न बने।
दरअसल, 29 सितंबर 2026 को शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के बाद से ही लोग काफी परेशानी झेल रहे हैं। सफर का समय कम होने के बजाय कई बार एक घंटे से ज्यादा का विलंब हो रहा है। ट्रैफिक पुलिस ने ईस्ट दिल्ली के एंट्री पॉइंट्स पर बैरिकेड्स लगाए हैं और मोटर चालकों को सलाह दी जा रही है कि वे NH-24 या DND फ्लाईवे जैसे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें।
डिजाइन की गलती बनी मुसीबत, अब सुधार की तैयारी
इस पूरी समस्या की जड़ कॉरिडोर का डिजाइन है। दक्षिण दिल्ली के डीसीपी (ट्रैफिक) संदीप गुप्ता के मुताबिक, संडेयल पार्क के पास एक बड़ा स्ट्रक्चरल बॉटलनेक है। यहां करीब 8-9 लेन का ट्रैफिक अचानक सिमटकर सिर्फ तीन लेन में बदल जाता है, जिससे नए फ्लाईओवर और पुराने बारापूला कॉरिडोर के मिलन स्थल पर भारी जाम लग जाता है।
इस समस्या को सुलझाने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) अब कई कदम उठा रहा है। इसमें लेन चैनलाइजेशन, सराय काले खां और आईटीओ के बीच सड़क चौड़ी करना और रिंग रोड पर गुरुद्वारे के पास सिद्धार्थ एक्सटेंशन के निवासियों के लिए यू-टर्न बनाने जैसे विकल्प शामिल हैं। इसके अलावा, PWD एक स्ट्रक्चरल डिजाइन कंसल्टेंट नियुक्त करेगा और गूगल मैप्स के साथ तालमेल बिठाएगा ताकि लोगों को रियल-टाइम ट्रैफिक की जानकारी मिल सके।
इस प्रोजेक्ट को लेकर अब राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है। PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा ने डिजाइन की खामियों के लिए पिछली AAP सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, AAP ने इस पूरे मामले में CBI जांच की मांग की है और सवाल उठाया है कि बिना किसी उचित तकनीकी मूल्यांकन के 1,635 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट कैसे मंजूर किया गया।