बारापुलला फेज-3 फ्लाईओवर बना मुसीबत, उद्घाटन के बाद लगा भीषण ट्रैफिक जाम

दिल्ली के लोगों को मयूर विहार से एम्स तक का सफर महज 15 मिनट में तय करने का वादा किया गया था, लेकिन हकीकत इसके उलट है। हाल ही में शुरू हुए बारापुलला फेज-3 ट्रैफिक जाम की समस्या ने आम जनता की मुसीबत बढ़ा दी है। लोग इस नए फ्लाईओवर की तुलना पुराने असफल बीआरटी (BRT) कॉरिडोर से कर रहे हैं, क्योंकि जिस रास्ते से समय बचने की उम्मीद थी, वहां अब गाड़ियां घंटों रेंग रही हैं।
करीब 1,635 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बने इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन 29 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा की मौजूदगी में किया था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद हालात इतने बिगड़ गए कि 5 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस को मयूर विहार की तरफ से इस फ्लाईओवर को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, ताकि भीषण ग्रिडलॉक को नियंत्रित किया जा सके।
11 साल का इंतजार और डिजाइन की खामियां
इस 3.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को बनाने में करीब 11 साल लग गए। अप्रैल 2015 में शुरू हुआ यह काम अक्टूबर 2017 तक पूरा होना था, लेकिन प्रशासनिक अड़चनों और जमीन अधिग्रहण के विवादों ने इसे लंबा खींच दिया। यमुना नदी के पूर्वी तट पर 2.5 एकड़ निजी कृषि भूमि के अधिग्रहण में ही ढाई साल लग गए। हालांकि, यह भारत का पहला ऐसा इंटीग्रेटेड फ्लाईओवर है जिसमें साइकिल ट्रैक और पैदल चलने वालों के लिए रास्ते बनाए गए हैं, लेकिन इसकी उपयोगिता पर अब सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट की प्लानिंग 2000 के दशक के मध्य में हुई थी, जो 2026 के ट्रैफिक लोड को संभालने में नाकाम रही। सराय काले खां के पास पांच रास्तों का एक जगह मिलना और लेन की विसंगतियां ट्रैफिक जाम का मुख्य कारण बन रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पहले इसे 'स्ट्रक्चरल बॉटलनेक' (ढांचागत कमी) बताया था, लेकिन बाद में 6 अक्टूबर को अपना बयान बदल दिया। अब पुलिस का दावा है कि गूगल मैप्स रीयल-टाइम ट्रैफिक डेटा सही नहीं दिखा रहा है, जिसकी वजह से ज्यादा ड्राइवर इस रास्ते को चुन रहे हैं और जाम लग रहा है। फिलहाल, ट्रैफिक पुलिस और पीडब्ल्यूडी ड्रोन सर्वे और संयुक्त निरीक्षण के जरिए जाम के हॉटस्पॉट की पहचान करने में जुटे हैं।