बारापुलला फ्लाईओवर: उद्घाटन के बाद ही ट्रैफिक जाम ने बढ़ाई मुसीबत, डिजाइन में बड़ी चूक

Kittu Kumari3 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
बारापुलला फ्लाईओवर: उद्घाटन के बाद ही ट्रैफिक जाम ने बढ़ाई मुसीबत, डिजाइन में बड़ी चूक

दिल्ली के नए बारापुलला फेज-III एलिवेटेड कॉरिडोर का सपना आम जनता के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हो रहा है। जिस फ्लाईओवर को सफर आसान बनाने के लिए बनाया गया था, वहीं अब लोग घंटों ट्रैफिक जाम में फंसे नजर आ रहे हैं। महज कुछ ही दिनों के भीतर इस 8 किलोमीटर लंबे स्ट्रेच पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं, जिससे सफर का समय एक घंटे से ज्यादा बढ़ गया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 29 सितंबर 2026 को इसका उद्घाटन किया था और 30 सितंबर से इसे जनता के लिए खोल दिया गया। लेकिन गुरुवार और शुक्रवार को यहाँ ट्रैफिक की ऐसी स्थिति रही कि लोग परेशान हो गए। हैरानी की बात यह है कि इस प्रोजेक्ट की प्लानिंग के लिए जिन स्टडीज का सहारा लिया गया, वे 20 साल पुरानी थीं। यानी 2014 में जब प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली और 2015 में काम शुरू हुआ, तब भी पुराने आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, जबकि पिछले दो दशकों में दिल्ली की सड़कों पर गाड़ियों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है।

पुरानी प्लानिंग और डिजाइन की गलतियां पड़ी भारी

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इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 1,635 करोड़ रुपये आई और यह 2017 तक पूरा होना था, लेकिन सालों की देरी के बाद अब जब यह खुला, तो इसकी खामियां सामने आ गईं। एक स्वतंत्र मूल्यांकन के मुताबिक, पीक समय में वाहनों की रफ्तार घटी है और यात्रा के समय में 22% की बढ़ोतरी हुई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि दुर्घटनाओं में 26% की वृद्धि देखी गई है।

ट्रैफिक पुलिस और PWD ने जब ड्रोन सर्वे किया, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। सर्वे में पाया गया कि यहाँ 'शार्प मर्जर्स' (तेज मोड़) हैं, जहाँ दो तीन-लेन वाली सड़कें अचानक एक ही तीन-लेन कॉरिडोर में मिल जाती हैं। सनडायल पार्क के ऊपर एक जंक्शन पर लेन अचानक खत्म हो जाती है, जिससे गाड़ियों के बीच टकराव की स्थिति बन रही है। इसके अलावा, नया तीन-लेन कॉरिडोर पुराने बारापुलला के दो-लेन वाले हिस्से से जुड़ता है, जिससे एक बड़ी 'बॉटलनैक' (रुकावट) पैदा हो रही है।

दक्षिण दिल्ली ट्रैफिक डीसीपी संदीप गुप्ता के अनुसार, नेविगेशन ऐप्स भी इस समस्या को बढ़ा रहे हैं, क्योंकि वे भारी ट्रैफिक को इसी कॉरिडोर की ओर मोड़ रहे हैं। राहगिरी फाउंडेशन की सह-संस्थापक सारिका पांडा भट्ट ने सुझाव दिया है कि लेन को धीरे-धीरे कम (tapering) किया जाना चाहिए ताकि ट्रैफिक का फ्लो बना रहे। फिलहाल, अधिकारी ट्रैफिक को NH-24 की तरफ मोड़ने और बैरिकेड्स लगाने पर विचार कर रहे हैं ताकि खतरनाक मोड़ों पर हादसों को रोका जा सके।

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