बारापुलला फ्लाईओवर पर लगा लंबा जाम, ट्रैफिक पुलिस ने बताया 'स्ट्रक्चरल बॉटलनेक' है बड़ी वजह

Kittu Kumari5 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
बारापुलला फ्लाईओवर पर लगा लंबा जाम, ट्रैफिक पुलिस ने बताया 'स्ट्रक्चरल बॉटलनेक' है बड़ी वजह

दिल्ली के बारापुलला फेज-III के खुलने के बाद जहां लोगों को उम्मीद थी कि सफर आसान होगा, वहीं असलियत इसके उलट रही। फ्लाईओवर पर लग रहे भारी जाम से लोग परेशान हैं। अब दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस समस्या की जड़ पकड़ी है। पुलिस के मुताबिक, पुराने बारापुलला फ्लाईओवर पर एक 'स्ट्रक्चरल बॉटलनेक' (संकीर्ण रास्ता) है, जिसकी वजह से गाड़ियां रेंगने को मजबूर हैं।

ट्रैफिक पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस पूरी स्थिति का विश्लेषण साझा किया है। पुलिस ने बताया कि समस्या तब शुरू होती है जब अलग-अलग दिशाओं से आने वाली गाड़ियां एक जगह मिलती हैं। विश्लेषण के अनुसार, लगभग 8 से 9 लेन का ट्रैफिक एक साथ पुराने बारापुलला फ्लाईओवर के एक ऐसे हिस्से में प्रवेश कर रहा है, जिसकी चौड़ाई केवल 3 लेन है। जब इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियां अचानक एक छोटी जगह पर सिमटती हैं, तो वहां ट्रैफिक जाम होना स्वाभाविक है।

मैप्स पर 'ग्रीन' सिग्नल, सड़क पर लंबी कतारें

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हैरानी की बात यह है कि सड़क पर स्थिति गंभीर होने के बावजूद डिजिटल नेविगेशन प्लेटफॉर्म्स, जैसे गूगल मैप्स, वास्तविक स्थिति को सही ढंग से नहीं दिखा रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस ने शिकायत की है कि गूगल मैप्स पर ट्रैफिक फ्लो को 'ग्रीन' दिखाया जा रहा है, जबकि असल में वहां लंबा जाम लगा हुआ है। इस अव्यवस्था के कारण वाहन चालक भ्रमित हो रहे हैं और जाम और बढ़ रहा है।

हाल ही में एक पत्रकार ने X पर पोस्ट किया था कि मयूर विहार से एम्स की ओर जाने वाले रास्ते पर करीब 2 किलोमीटर लंबा जाम लगा है, जिसमें एम्बुलेंस तक फंसी हुई थी। इस स्थिति को संभालने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने अब फेज-III से आने वाले ट्रैफिक को NH-24 और DND की तरफ डायवर्ट करना शुरू कर दिया है। मौके पर पुलिसकर्मी तैनात रहकर ट्रैफिक को रेगुलेट कर रहे हैं।

भविष्य में ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार मिलकर 1,789.52 करोड़ रुपये की लागत से 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (ITMS) लागू करने जा रही हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत 42 ट्रैफिक कॉरिडोर को कवर किया जाएगा। इसमें एडेप्टिव ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएंगे, जो सड़क पर गाड़ियों की संख्या के हिसाब से अपने आप समय बदल लेंगे, ताकि जिस तरफ ट्रैफिक ज्यादा हो, वहां रेड लाइट का समय कम किया जा सके और वाहनों की आवाजाही सुगम हो सके।

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