एशियन गेम्स के कुश्ती चैंपियंस का दिल्ली में जोरदार स्वागत, अब LA ओलंपिक पर नजर

एशियन गेम्स 2026 में भारत का नाम रोशन करने वाले कुश्ती सितारों का दिल्ली लौटने पर भव्य और जोरदार स्वागत किया गया। गोल्ड मेडलिस्ट सुजीत कलकल, अमन सहरावत और सिल्वर मेडलिस्ट नितेश कुमार जब अपने घर लौटे, तो प्रशंसकों और समर्थकों की भारी भीड़ उनके स्वागत में उमड़ी। इन युवा पहलवानों ने न केवल देश को पदक दिलाए, बल्कि अब उन्होंने लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक में पदक जीतने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित कर लिया है।
भारत के लिए यह अभियान पिछले छह दशकों का सबसे शानदार प्रदर्शन रहा, जहां देश ने कुल छह पदक जीते। इनमें दो स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक शामिल हैं। अमन सहरावत ने 57 किग्रा फ्रीस्टाइल और सुजीत कलकल ने 65 किग्रा फ्रीस्टाइल श्रेणी में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा। इसके अलावा, अंतिम पंघाल और नितेश सिवाच ने सिल्वर, जबकि दीपक पुनिया और सुनील कुमार ने ब्रोंज मेडल अपने नाम किए।
सुजीत का ऐतिहासिक कमबैक और अमन का संकल्प
सुजीत कलकल की जीत किसी चमत्कार से कम नहीं थी। फाइनल मुकाबले में एक समय वह 2-9 से पिछड़ रहे थे और मैच खत्म होने में केवल 1 मिनट 40 सेकंड बचे थे। ऐसे दबाव भरे माहौल में सुजीत ने गजब का धैर्य दिखाया और लगातार टेकडाउन करते हुए आखिरी 11 सेकंड में मैच पलट दिया। सुजीत ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि देश के लिए गोल्ड जीतना गर्व की बात है और अब वे पूरी तैयारी के साथ LA 2028 ओलंपिक की ओर बढ़ रहे हैं।
वहीं, भारत के सबसे युवा ओलंपिक पदक विजेता अमन सहरावत ने दुनिया के चैंपियन हान चोंग सोंग को हराकर स्वर्ण पदक जीता। अमन ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोच सतपाल सिंह को दिया। अमन ने आत्मविश्वास के साथ कहा, "अब हमारा लक्ष्य LA ओलंपिक में राष्ट्रीय गान बजवाना है।" कोच सतपाल सिंह ने भी अमन की कड़ी मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि अमन पूरी तरह से अपनी ट्रेनिंग और कुश्ती पर केंद्रित हैं और उनमें ओलंपिक गोल्ड जीतने की पूरी क्षमता है।
इस उपलब्धि में नितेश कुमार का योगदान भी खास रहा। उन्होंने 97 किग्रा ग्रीको-रोमन श्रेणी में सिल्वर पदक जीता। नितेश 64 साल बाद इस श्रेणी में फाइनल तक पहुंचने वाले दूसरे भारतीय पहलवान बन गए हैं, जिससे यह साबित हो गया कि भारत अब ग्रीको-रोमन कुश्ती में भी दुनिया को टक्कर दे सकता है।