रविवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई देश की गंभीर स्थिति का संकेत: अशोक गहलोत

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने देश के मौजूदा हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जब देश की सबसे बड़ी अदालत को रविवार जैसे अवकाश के दिन भी सुनवाई करनी पड़े, तो यह साफ जाहिर करता है कि देश की स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। गहलोत ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के बीच लगाए गए भारी सुरक्षा घेरे और बैरिकेडिंग का जिक्र करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों को काफी दिक्कतों और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है।
अशोक गहलोत ने सरकार से अपील की है कि वह विपक्ष के साथ संवाद स्थापित करे और चुनावी अनियमितताओं से जुड़ी चिंताओं को दूर करे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में बातचीत के जरिए मसलों को सुलझाना जरूरी है।
वकीलों ने भी जताई नाराजगी, कोर्ट ने दिए राहत के निर्देश
सिर्फ राजनीतिक गलियारे ही नहीं, बल्कि कानूनी जगत में भी इस स्थिति को लेकर नाराजगी देखी गई। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के अध्यक्ष देवव्रत ने कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट परिसर के पास वकीलों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और सुरक्षा के नाम पर अनावश्यक पाबंदियां लगाई गईं। उन्होंने बताया कि उन्हें वर्चुअल सुनवाई का भरोसा दिया गया था, लेकिन इंटरनेट सेवाएं ही बंद कर दी गईं। साथ ही, धारा 163 लागू करने की सूचना न तो बार को दी गई और न ही बेंच को।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। जस्टिस जॉयमल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास लागू निषेधाज्ञा (धारा 163 BNSS) को तुरंत हटाया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय तक पहुंच में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए और शांतिपूर्ण नागरिकों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए।
अधिवक्ता गौरव यादव ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब रेलवे, मेट्रो और ट्रैफिक की आवाजाही बहाल होगी और अनावश्यक बैरिकेड्स हटाए जाएंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक बेहद जरूरी न हो, इंटरनेट सेवाओं को निलंबित नहीं किया जाना चाहिए।