पाठ्यपुस्तक खरीद घोटाला: मंत्री आशीष सूद ने AAP के आरोपों को बताया बेबुनियाद
दिल्ली शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने AAP के पाठ्यपुस्तक खरीद घोटाले के आरोपों को बेबुनियाद बताया और पुराने आंकड़ों से किया पलटवार।

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं द्वारा लगाए गए पाठ्यपुस्तक खरीद घोटाले के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। शनिवार को दिल्ली सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री ने इन दावों को आधारहीन बताया और इसे शिक्षा विभाग की प्रगति में बाधा डालने की एक राजनीतिक रणनीति करार दिया।
मंत्री आशीष सूद ने आरोपों को गलत साबित करने के लिए मीडिया के सामने पाठ्यपुस्तकों की फिजिकल कॉपी, टेंडर से संबंधित वर्क ऑर्डर और यहां तक कि माप के लिए स्केल भी पेश किए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह पूरा विवाद AAP के पुराने और नए नेताओं के बीच अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की आंतरिक लड़ाई का नतीजा है। इस दौरान उन्होंने 1971 की फिल्म 'नया जमाना' का गाना 'चोरों को सारे नजर आते हैं चोर' बजाकर विपक्षी नेताओं पर कटाक्ष किया।
पुराने और नए दामों का दिया हवाला
किताबों की कीमतों पर बात करते हुए मंत्री ने कक्षा 8 की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'मल्हार' का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि जहां AAP ने 65 रुपये की NCERT बिक्री कीमत पर सवाल उठाए, वहीं वर्तमान सरकार ने इसे मात्र 28.61 रुपये में खरीदा है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि 2022 में पिछली सरकार ने इसी आकार की 'होम साइंस' की किताब 55 रुपये में छापी थी, जो मौजूदा लागत से लगभग दोगुनी है।
मंत्री ने आंकड़ों के जरिए यह भी दिखाया कि कक्षा 6, 7 और 8 की किताबों की अधिकतम कीमतें पिछली सरकार के मुकाबले अब काफी कम हो गई हैं। उदाहरण के तौर पर, कक्षा 6 की किताब की कीमत 133 रुपये से घटकर 57.76 रुपये रह गई है। आशीष सूद ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि AAP के कार्यकाल के दौरान '60 प्रतिशत कमीशन' का बिजनेस मॉडल चलता था और मौजूदा AAP नेता किताबों की वास्तविक कीमतों से अनजान हैं।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग गलत जानकारी फैलाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं, समीक्षा पूरी होने के बाद उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अगस्त और सितंबर 2023 के आधिकारिक पत्र भी जारी किए, जिनमें AAP शासन के दौरान supplied किताबों की खराब प्रिंटिंग और गुणवत्ता की कमी का जिक्र था। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार पूरी पारदर्शिता और क्वालिटी टेस्टिंग के बाद किताबें खरीद रही है और जल्द ही पिछली सरकार के भ्रष्टाचार के और सबूत सामने आएंगे।