‘अगर अपने देश में तिरंगा नहीं फहराएंगे तो क्या पाकिस्तान में फहराएंगे?’: दिल्ली में तिरंगा मार्च पर बरसे अरविंद केजरीवाल

Kittu Kumari16 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
‘अगर अपने देश में तिरंगा नहीं फहराएंगे तो क्या पाकिस्तान में फहराएंगे?’: दिल्ली में तिरंगा मार्च पर बरसे अरविंद केजरीवाल

देश की राजधानी दिल्ली में 'लेहरा दो तिरंगा' मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई और कार्यकर्ताओं की हिरासत को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने इस कार्रवाई को 'पूरी तरह से तानाशाही' करार देते हुए कहा कि जो लोग भारतीय तिरंगे से समस्या रखते हैं, उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के पास आयोजित तिरंगा मार्च में पुलिस ने हस्तक्षेप किया और कार्यकर्ता अभिजीत दिप्के सहित कई लोगों को हिरासत में ले लिया। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "अगर हम अपने देश में तिरंगा नहीं फहराएंगे, तो क्या हम इसे पाकिस्तान में फहराएंगे? जिन्हें भारतीय तिरंगे से दिक्कत है, वे पाकिस्तान चले जाएं।"

तानाशाही का आरोप और पुलिस की कार्रवाई

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अरविंद केजरीवाल ने सवाल उठाया कि आखिर अपने ही देश का राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपराध कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि सत्तासीन सरकार कितनी डरी हुई है। केजरीवाल के मुताबिक, अभिजीत दिप्के की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि मोदी सरकार इस तरह के अभियानों से घबरा रही है।

इस बीच, दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी पार्टी के इस अभियान का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि पार्टी के युवा साथियों ने राष्ट्रपति भवन और संसद के सामने 270 फीट लंबा तिरंगा फहराया था। भारद्वाज ने तंज कसते हुए कहा, "एक स्वतंत्र देश में अपने देश का झंडा फहराने में क्या गलत है? क्या भाजपा चाहती है कि हम पाकिस्तान, बांग्लादेश या अमेरिका के झंडे फहराएं?"

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को सेंट्रल दिल्ली के विभिन्न इलाकों में करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस का दावा है कि कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क जैसे प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति के जमावड़ा लगाना कानूनन गलत था। सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के 6,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया था।

वहीं, इसी दौरान मंडी हाउस के पास ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और वामपंथी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, जिसके बाद वहां भी पुलिस की कार्रवाई देखने को मिली।

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