गुरुग्राम: आर्टेमिस अस्पताल पर महिला के इलाज में लापरवाही का आरोप, पति ने लगाया गंभीर आरोप
गुरुग्राम के आर्टेमिस अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत। पति ने लगाया लापरवाही का आरोप, 20 लाख रुपये वसूलने का दावा।

गुरुग्राम के सेक्टर-51 स्थित आर्टेमिस अस्पताल में इलाज के दौरान एक 41 वर्षीय महिला की मौत का मामला सामने आया है। मृतका के पति ने अस्पताल प्रबंधन और दो सीनियर सर्जनों पर इलाज में भारी लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित पति ने पुलिस आयुक्त और स्वास्थ्य विभाग को शिकायत भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
रोहतक की राजेंद्रा कॉलोनी निवासी सुनील कुमार के मुताबिक, उनकी पत्नी गीता को नसों की समस्या थी, जिसके लिए 13 अगस्त को उन्हें आर्टेमिस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में डॉ. सुमित सिंह के पास ले जाया गया था। जांच के बाद गीता को भर्ती किया गया। इलाज के दौरान 25 अगस्त को पेट दर्द की शिकायत होने पर सीटी स्कैन किया गया, जिसमें अपेंडिक्स की समस्या बताई गई। इसके बाद 27 अगस्त को डॉ. राकेश दुरखुरे और डॉ. मुंजाल बावा की टीम ने उनका ऑपरेशन किया।
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत और लाखों का खर्च
परिजनों का आरोप है कि पहले ऑपरेशन के बाद ही गीता की तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें आईसीयू में हाई ऑक्सीजन पर रखना पड़ा। इस दौरान परिवार का दावा है कि उनसे आईवीआईजी इंजेक्शन के नाम पर करीब 5 लाख रुपये लिए गए। 18 सितंबर को डॉक्टरों ने इंफेक्शन बताकर दोबारा ऑपरेशन का दबाव बनाया, जबकि उस समय मरीज का वजन 56 किलो से घटकर महज 45 किलो रह गया था। सुनील कुमार का आरोप है कि बिना किसी नए सिटी स्कैन या एमआरआई के, सिर्फ एक रेफरल नोट के आधार पर 19 सितंबर की रात दूसरा ऑपरेशन कर दिया गया।
दूसरे ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बताया कि पेट में एक पत्ता (लीफ) मिला है और आंत लीक हो गई है, जिसके कारण पूरा पेट खोलकर 30 टांके लगाने पड़े। पति का कहना है कि उन्हें न तो वह पत्ता दिखाया गया और न ही निकाले गए इंफेक्शन को लैब जांच के लिए भेजा गया।
पीड़ित परिवार के अनुसार, 25 सितंबर को टीएलसी 22,000 होने के बावजूद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। दो दिन बाद 27 सितंबर को सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें दोबारा इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां मल्टी ऑर्गन फेल्योर बताया गया और 29 सितंबर की सुबह गीता की मौत हो गई। सुनील कुमार का आरोप है कि इस पूरे इलाज के दौरान अस्पताल ने उनसे लगभग 20 लाख रुपये वसूल लिए। उन्होंने मांग की है कि अस्पताल का मेडिकल रिकॉर्ड सीज कर मेडिकल बोर्ड से इसकी जांच कराई जाए और संबंधित डॉक्टरों पर लापरवाही से मौत की धाराओं के तहत कार्रवाई हो।