17 साल के अर्जित अग्रवाल की पहल, अब क्लासरूम में बच्चे सीखेंगे स्टार्टअप कल्चर
दिल्ली के 17 वर्षीय अर्जित अग्रवाल अपनी 'स्प्राउट एकेडमी' के जरिए स्कूली बच्चों में एंटरप्रेन्योरशिप और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स विकसित कर रहे हैं।

अक्सर स्कूल की पढ़ाई किताबों और रटने तक सीमित रह जाती है, लेकिन दिल्ली के एक युवा उद्यमी अर्जित अग्रवाल ने इस सोच को बदलने की ठानी है। महज 17 साल की उम्र में अर्जित अपनी 'स्प्राउट एकेडमी' (Sprout Academy) के जरिए स्कूली बच्चों के बीच स्टार्टअप कल्चर और एंटरप्रेन्योरियल सोच को बढ़ावा दे रहे हैं। उनका मकसद छात्रों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें असल दुनिया की समस्याओं को सुलझाने के काबिल बनाना है।
अर्जित ने इस लर्निंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत तब की थी जब वह खुद केवल 15 साल के थे। दिल्ली से संचालित होने वाली यह एकेडमी पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए विशेष स्कूल प्रोग्राम और कैंप आयोजित करती है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवाओं में प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स विकसित करना है, ताकि वे अपने आसपास की छोटी-बड़ी चुनौतियों को पहचान सकें और उनके व्यावहारिक समाधान खोज सकें।
इनोवेटिव आइडियाज और आत्मविश्वास पर जोर
स्प्राउट एकेडमी के जरिए बच्चों को न केवल नए आइडियाज सोचना सिखाया जाता है, बल्कि उन्हें उन विचारों को हकीकत में बदलने का आत्मविश्वास भी दिया जाता है। अर्जित का मानना है कि अगर बचपन से ही बच्चों में उद्यमिता (Entrepreneurship) के बीज बोए जाएं, तो वे भविष्य में अधिक सक्रिय और रचनात्मक नागरिक बनेंगे।
इस प्रोग्राम के जरिए छात्रों को यह सिखाया जा रहा है कि एंटरप्रेन्योरशिप केवल बिजनेस शुरू करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत और शैक्षणिक विकास का एक सशक्त माध्यम है। इस पहल से युवा छात्र अब समस्याओं को बोझ मानने के बजाय उन्हें एक अवसर के रूप में देखना सीख रहे हैं।